सूरत / नवसारी। दक्षिण गुजरात में मानसून की तेज बारिश के साथ ही जानलेवा बीमारी ‘लेप्टोस्पायरोसिस’ ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। जुलाई महीने में हुई झमाझम बारिश के बाद सूरत और नवसारी जिलों में इस सीजन के पहले दो पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं। नए मामले उजागर होते ही स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है और प्रभावित ग्रामीण इलाकों में एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
जांच में हुई पुष्टि, मरीजों की हालत स्थिर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 25 जुलाई को सूरत जिले की पलसाणा तहसील के कारेली गांव निवासी एक 46 वर्षीय व्यक्ति को सूरत के नई सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लक्षणों के आधार पर की गई लैब जांच में उसमें लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की पुष्टि हुई।
इसके बाद, 1 अगस्त को नवसारी जिले के काशीवाड़ी गांव के रहने वाले 78 वर्षीय बुजुर्ग में भी इस बीमारी के लक्षण पाए गए, जिनका इलाज फिलहाल नवसारी सिविल अस्पताल में जारी है। राहत की बात यह है कि चिकित्सकों के अनुसार दोनों ही मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर है और वे उपचार का त्वरित लाभ ले रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के दावों पर उठे सवाल
मानसून की शुरुआत से पहले क्षेत्रीय उप-निदेशक (आरडीडी) डॉ. सीआर पटेल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इसमें जोखिम वाले ग्रामीण इलाकों में ‘कीमो प्रोफिलैक्सिस’ के तहत डॉक्सीसाइक्लिन गोलियों के वितरण और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, सीजन की शुरुआत में ही मरीज मिलने से रोकथाम की पूर्व तैयारियों और जमीनी व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
चूहा नियंत्रण अभियान बंद होना बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, लेप्टोस्पायरोसिस का मुख्य कारण संक्रमित चूहों और अन्य जानवरों का मूत्र होता है, जो जलभराव के दौरान खेतों, रास्तों और रुके हुए पानी में घुल जाता है। किसान या ग्रामीण जब बिना किसी सुरक्षा के नंगे पांव इन पानी भरे खेतों में उतरते हैं, तो यह बैक्टीरिया त्वचा के घावों या कट के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है। सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ समय से ‘एंटी-रोडेंट एक्टिविटी’ (चूहा मारने का अभियान) धीमा या बंद रहने के कारण संक्रमण फैलने का जोखिम काफी बढ़ गया है।
बीमारी का पुराना इतिहास और आंकड़े
दक्षिण गुजरात में इस बीमारी का इतिहास काफी चिंताजनक रहा है:
- 2011 का भयावह दौर: वर्ष 2011 में इस बीमारी ने विकराल रूप धारण किया था, जब कुल 916 मामले सामने आए थे और 177 लोगों की जान चली गई थी।
- 2023 में मिली सफलता: कड़े स्वास्थ्य कदमों और अभियानों के चलते वर्ष 2023 में केस घटकर मात्र 5 रह गए थे तथा कोई मौत दर्ज नहीं हुई थी।
- 2025 में फिर बढ़ा ग्राफ: चूहा नियंत्रण अभियान में आई सुस्ती के कारण वर्ष 2025 में मामलों की संख्या बढ़कर 37 हो गई थी, जिनमें 4 लोगों की मौत दर्ज की गई थी।
2025 के जिलावार आंकड़े
पिछले वर्ष (2025) दर्ज कुल 37 मामलों में सूरत जिले में सर्वाधिक 10 मामले आए थे, जहां 1 मरीज की मृत्यु हुई। तापी और नवसारी में 9-9 मामले दर्ज किए गए (तापी में 1 मौत), वलसाड में 4 मामले (1 मौत), सूरत महानगरपालिका (एसएमसी) क्षेत्र में 2 मामले तथा अन्य जिलों में 3 मामले (1 मौत) सामने आए थे।
डॉक्टरों की सलाह और सावधानियां
स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों ने ग्रामीणों व किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है:
- जलभराव वाले क्षेत्रों और कीचड़ भरे खेतों में काम करते समय गमबूट पहनें, नंगे पांव जाने से बचें।
- पैरों में कट या घाव होने पर उसे ठीक से ढककर रखें और दूषित पानी के संपर्क में न आने दें।
- बुखार, तेज सिरदर्द, बदन दर्द या आंखों में लालिमा दिखने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
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