गांधीनगर। राज्य में जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई मूसलाधार बारिश के चलते प्रमुख नदियों और जलाशयों के जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य की जीवनरेखा कहे जाने वाले नर्मदा डैम सहित कई बड़े बांधों में नए पानी की आवक से किसानों और आम जनता ने राहत की सांस ली है।
जलाशयों में असमान जलभराव
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल 206 जलाशयों में वर्तमान में उनकी क्षमता का 58.96% (3,28,960 एमसीएफटी) जल संग्रहण हो चुका है। हालांकि, व्यापक वर्षा के बाद भी जल वितरण में भारी असमानता देखने को मिल रही है, जहाँ एक तरफ 25 बांध पूरी तरह भर चुके हैं, वहीं 75 बांधों (36.89%) में पानी का स्तर 25% से भी कम बना हुआ है।
34 डैम हाई अलर्ट पर
जलभराव की स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने 34 डैमों को ‘हाई अलर्ट’, 8 को ‘अलर्ट’ और 10 को ‘वार्निंग’ पर रखा है। मोरबी का मच्छू-2 व ब्राह्मणी डैम, भावनगर का शेतरुंजी डैम तथा सुरेंद्रनगर का धोलीधाजा व फल्कू डैम 100% भरने के कारण हाई अलर्ट पर हैं। इसके अलावा अमरेली का धातारवडी, भरूच का ढोली, महिसागर का वाणकबोरी और मोरबी का ब्राह्मणी डैम ओवरफ्लो हो रहे हैं, जिनसे अतिरिक्त पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है।
दूसरी तरफ, कई क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण सीपू डैम (4.92%), उंड-1 डैम (5.45%), भादर डैम (24.04%) और दांतीवाड़ा डैम (26.30%) में बेहद कम जल संचय हुआ है।

ताप्ती नदी में बढ़ा जलस्तर
दक्षिण गुजरात की जीवनरेखा माने जाने वाले उकाई डैम (सोनगढ़) में ऊपरी क्षेत्रों से भारी आवक के चलते बीते तीन दिनों से 2 लाख क्यूसेक से अधिक पानी आ रहा है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए हाइड्रो पावर यूनिट शुरू कर ताप्ती नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। ताप्ती नदी पर बने प्रकाशा बैराज का जलस्तर क्षमता के करीब पहुँचने पर उसके सभी 22 गेट खोलकर 2.01 लाख क्यूसेक पानी नदी में बहाया गया।
10% अधिक जल संग्रह
पिछले वर्ष 2025 की तुलना में इस वर्ष अगस्त की शुरुआत तक जलाशयों में कुल जल संग्रह 10% से 12% अधिक दर्ज किया गया है। प्रशासन निचले इलाकों और नदी तटीय क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
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