प्रवीण साहू, अभनपुर। ग्राम कोलियारी स्थित शीतला तालाब में जारी मिट्टी उत्खनन का मामला अब केवल राजस्व विभाग के स्थगन आदेश की अवहेलना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि खनिज विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर बिना प्रशासनिक आदेश के बावजूद मशीनों और हाइवा वाहनों से उत्खनन एवं परिवहन जारी रहने के आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर मौके पर पहुंचने के बाद भी खनिज विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी है। जानकारों के अनुसार किसी भी प्रकार के खनिज अथवा मिट्टी उत्खनन और परिवहन के लिए निर्धारित नियमों, अनुमति और रॉयल्टी संबंधी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। यदि उत्खनन स्थल विवादित हो, उस पर स्थगन आदेश लागू हो या वैध दस्तावेज उपलब्ध न हों, तो विभाग को तत्काल कार्रवाई करने का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों होती है।

मौके पर मशीन और हाइवा मिले, फिर भी खाली हाथ लौटी टीम
सूत्रों के मुताबिक रायपुर खनिज विभाग के निरीक्षक प्रवीण नेताम अपने अमले के साथ आज दोपहर जब स्थल पर पहुंचे तब वहां एक चैन माउंटेन मशीन और लगभग आधा दर्जन हाइवा वाहन कार्यरत थे। इसके बावजूद न तो किसी वाहन को जब्त किया गया और न ही मशीन पर कोई कार्रवाई हुई। विभागीय टीम कुछ देर निरीक्षण के बाद वापस लौट गई।

यही वजह है कि अब लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि जब मौके पर गतिविधियां दिखाई दे रही थीं तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या विभाग ने दस्तावेजों की जांच की? क्या परिवहन की वैध अनुमति और रॉयल्टी पर्चियों का सत्यापन किया गया? यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप था तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई ?
ग्रामीणों की सहमति क्या कानून से ऊपर?
मीडिया द्वारा पूछे जाने पर खनिज निरीक्षक नेताम ने कहा कि ग्रामीणों की सहमति से कार्य हो रहा है, इसलिए अभी काम बंद करने की समझाइश दी गई है। मौके पर एक चैन माउंटेन सहित चार हाईवा था। किसी भी प्रकार की वाहनों की जब्ती की कार्रवाई हमारे द्वारा नहीं की गई है।
लेकिन यह जवाब कई नए सवाल खड़े कर रहा है। कानूनी तौर पर खनिज उत्खनन और परिवहन का निर्धारण ग्रामीणों की मौखिक सहमति से नहीं बल्कि शासन द्वारा निर्धारित नियमों, अनुमति और विभागीय स्वीकृतियों से होता है। ऐसे में यदि किसी स्थल पर स्थगन आदेश प्रभावी है, तो केवल सहमति का तर्क देकर कार्रवाई से बचना विभाग की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
खनिज विभाग की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि किसी सामान्य वाहन चालक से बिना दस्तावेज रेत या मुरूम परिवहन करते हुए पकड़ा जाए तो खनिज विभाग तत्काल जब्ती और जुर्माने की कार्रवाई करता है। लेकिन यहां स्थगन आदेश लागू होने के बावजूद मशीनें और हाइवा चलते रहे तथा विभागीय अमला देखकर भी लौट गया। इससे विभाग की निष्पक्षता और कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या संरक्षण प्राप्त है उत्खनन कार्य को?
लगातार जारी गतिविधियों और कार्रवाई के अभाव को देखते हुए लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं संबंधित लोगों को विभागीय संरक्षण तो नहीं मिल रहा। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन जिस तरह से मौके पर पहुंचकर भी कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया, उससे संदेह और गहरा गया है।
जवाब मांग रहा है शीतला तालाब का मामला
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजस्व विभाग का स्थगन आदेश लागू है, खनिज नियमों के पालन को लेकर सवाल हैं और मौके पर मशीनें व हाइवा मौजूद पाए गए, तो खनिज विभाग ने आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की? जिला प्रशासन और खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट करना चाहिए कि नियमों का पालन हुआ या नहीं, और यदि नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित पक्षों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
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