चंडीगढ़। हरियाणा में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और अब यह गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। शुक्रवार को ही राज्यभर में पराली जलाने के 144 नए मामले सामने आए, जिससे कृषि विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक कुल 1709 मामलों की पहचान की जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले चार वर्षों की तुलना में इस बार पराली जलाने की घटनाएं सबसे अधिक दर्ज की जा रही हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं।


जिलों में स्थिति गंभीर
शुक्रवार को सामने आए मामलों में रोहतक सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 36 घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा जींद में 29, झज्जर में 20, सोनीपत में 13, सिरसा में 10 और भिवानी में 7 मामले सामने आए।
इसी तरह कैथल में 8, कुरुक्षेत्र और फतेहाबाद में 6-6, हिसार में 4, करनाल में 3 तथा अंबाला और चरखी दादरी में 1-1 मामला दर्ज किया गया है। लगातार बढ़ते मामलों ने कई जिलों को पराली जलाने के ‘हॉटस्पॉट’ के रूप में चिन्हित कर दिया है।


प्रदूषण पर गंभीर असर
पराली जलाने की इन घटनाओं का सीधा असर वायु गुणवत्ता पर पड़ रहा है। हरियाणा और दिल्ली-NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार गिर रहा है और AQI खतरनाक श्रेणी की ओर बढ़ रहा है।
प्रशासन की सख्ती और अपीलों के बावजूद खेतों में पराली जलाने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।