राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने 645 करोड़ के HSAMB घोटाले में CBI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। चार्जशीट में देरी के कारण आरोपी को जमानत मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई है।
चंडीगढ। कांग्रेस महासचिव व राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड (HSAMB) से जुड़े कथित ₹645 करोड़ बैंक घोटाले को लेकर CBI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि मामले में जांच एजेंसी 90 दिन की वैधानिक अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई, जिसके चलते मुख्य आरोपी को अदालत से ‘डिफॉल्ट बेल’ मिल गई।
सुरजेवाला ने बयान जारी कर कहा कि हरियाणा में जनता के पैसे से जुड़े इतने बड़े कथित घोटाले में जांच एजेंसी की यह चूक गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि HSAMB के करोड़ों रुपये निजी बैंकों में कथित मिलीभगत के जरिए लगाए गए और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। उन्होंने दावा किया कि घोटाले की राशि ₹645 करोड़ से भी अधिक हो सकती है।
कांग्रेस नेता के मुताबिक, मामले में पूर्व वित्त नियंत्रक राजेश सांगवान को 14 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन CBI 90 दिन की वैधानिक समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि इसी वजह से आरोपी को पंचकूला कोर्ट से डिफॉल्ट बेल मिल गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला सैकड़ों करोड़ रुपये के सरकारी फंड से जुड़ा हो, तब जांच एजेंसी समयसीमा कैसे चूक सकती है।
सुरजेवाला ने यह भी आरोप लगाया कि 14 जनवरी 2026 को कथित तौर पर फर्जी शेल कंपनियों—SRR Planning Gurus Pvt. Ltd. और Mannat Contractors को RTGS के जरिए ₹10 करोड़ ट्रांसफर किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि फ्रॉड की जानकारी मिलने के बावजूद जिम्मेदार स्तर पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसियों या अदालत की अंतिम प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। CBI की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

