हेमंत शर्मा, इंदौर। मालवा-निमाड़ को गुजरात से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इंदौर-दाहोद रेल परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2008 में भूमिपूजन के बाद शुरू हुई इस परियोजना को करीब 17 साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इंदौर से दाहोद तक सीधा रेल संपर्क अब तक हकीकत नहीं बन पाया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस परियोजना की डेडलाइन कितनी बार बढ़ेगी और इंदौर-दाहोद के बीच ट्रेन के लिए जनता को और कितना इंतजार करना पड़ेगा?
मार्च 2026 की डेडलाइन भी निकल गई
रेलवे की ओर से इंदौर-धार सेक्शन में मार्च 2026 के आसपास ट्रेन संचालन का लक्ष्य रखा गया था। मार्च तक शेष निर्माण और तकनीकी काम पूरे करने के निर्देश भी दिए गए थे, ताकि ट्रायल रन कराया जा सके। लेकिन तय समयसीमा निकलने के बाद भी पूरा रेल संपर्क शुरू नहीं हो सका। यानी सालों के इंतजार के बाद एक और डेडलाइन आई और निकल गई, लेकिन यात्रियों के हिस्से में अब भी इंतजार ही आया।
2957 मीटर की सुरंग बनी सबसे बड़ी अड़चन
परियोजना में टीही के आगे करीब 2.957 किलोमीटर लंबी सुरंग सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सों में से एक रही है। हाल की स्थिति में सुरंग की लाइनिंग का काम पूरा बताया गया है, लेकिन इसके भीतर ट्रैक, ड्रेनेज और अन्य तकनीकी काम भी चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे हैं। अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार सुरंग में 1216 मीटर बैलास्टलेस ट्रैक बिछाया जा चुका था। मतलब साफ है—कागजों पर परियोजना अंतिम दौर में पहुंचती रही, लेकिन जमीन पर ट्रेन चलने का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ।
कभी मार्च 2025, फिर मार्च 2026… अब अगली तारीख क्या?
इस परियोजना को लेकर पहले भी मार्च 2025 तक इंदौर-धार सेक्शन में ट्रेन चलाने का लक्ष्य सामने आया था। इसके बाद लक्ष्य आगे बढ़ा और मार्च 2026 की समयसीमा पर जोर दिया गया। लेकिन यह डेडलाइन भी पूरी नहीं हो सकी। अब सवाल रेलवे से है—क्या फिर नई तारीख मिलेगी या इस बार काम की ऐसी रफ्तार दिखाई जाएगी कि यात्रियों को वास्तव में ट्रेन मिल सके?
205 किलोमीटर की परियोजना, अब भी अधूरा सफर
दिसंबर 2025 में लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक दाहोद-इंदौर नई लाइन की कुल लंबाई 205 किलोमीटर और लागत करीब 9,746 करोड़ रुपये बताई गई थी। उस समय 57 किलोमीटर काम पूरा और शेष काम प्रगति पर बताया गया था।यह लाइन सिर्फ एक रेल परियोजना नहीं है। इससे इंदौर, धार, झाबुआ और आदिवासी अंचल को गुजरात से बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी यह रेल संपर्क माल ढुलाई और व्यापार के लिहाज से अहम माना जाता है।
जनता का सवाल—इतनी लंबी देरी का जिम्मेदार कौन?
सालों से चल रही इस परियोजना में कभी जमीन, कभी निर्माण और कभी तकनीकी कामों को लेकर देरी की खबरें सामने आती रही हैं। मई 2026 में परियोजना के एक हिस्से में भुगतान में देरी के चलते काम प्रभावित होने और छोटे वेंडरों के करोड़ों रुपये बकाया होने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। अब जरूरत नई तारीखों और नए दावों की नहीं, बल्कि जमीन पर काम पूरा करने की है। 17 साल से इंतजार कर रहे मालवा-निमाड़ के लोगों का सवाल सीधा है—इंदौर-दाहोद रेल लाइन आखिर कब पूरी होगी और कब इस पटरी पर यात्री ट्रेन वास्तव में दौड़ेगी?

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