स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक व्यावसायिक जहाजों पर हाल में हुए हमले को लेकर ईरान ने ट्रंप के सलाहकारों के साथ हुई गुप्त बातचीत में स्वीकार किया है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज जीएफएस गैलेक्सी पर हमले होना एक गलती थी. एक मीडिया ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है. US चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से स्वीकार करे कि यह एक गलती थी.

अब तेहरान बातचीत जारी रखना चाहता है, जबकि अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अगर हमले दोबारा हुए तो जवाब और भी सख्त होगा.

अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा है कि ईरान ने बंद कमरे में मान लिया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमला करके बहुत बड़ी गलती की है. अमेरिकी मीडिया के अनुसार, जहाजों पर हमला ईरान के भीतर मौजूद कट्टरपंथी गुट के कुछ तत्वों ने किया, जिनका मकसद दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को पटरी से उतारना था. जैसा कि ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन को बताया.

ईरानी अधिकारियों ने इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए अमेरिकी बातचीत दल को सफाई दी है. ईरान का कहना है कि यह हमला उनकी सरकार या मुख्य सेना का फैसला नहीं था. 

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व वाली अमेरिकी वार्ता टीम को ओमान की राजधानी मस्कट में जारी बातचीत आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है. यह वार्ता शनिवार से शुरू हुई है.

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