दक्षिण दिल्ली के हौजखास (Hauzkhas) इलाके में लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी मिलने की शिकायतों के बीच कई लोगों के बीमार पड़ने के बाद इस मुद्दे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में याचिका दायर की गई है। मामले पर अदालत 4 जून को सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ता अभिएसुमत गुप्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि इलाके में लगातार दूषित पानी (Contaminated water) की आपूर्ति की जा रही है, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को गंदा और बदबूदार पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
30 मई से क्षेत्र के एक्स और वाई ब्लॉक में घरों तक पहुंच रहा पानी बदबूदार और गंदगी से भरा हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। दूषित पानी के सेवन के कारण इलाके में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। कई लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ चुके हैं और उन्हें चिकित्सकीय उपचार लेना पड़ा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है। याचिका में प्रभावित क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता की तत्काल जांच, सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिका के अनुसार, 30 और 31 मई को दिल्ली जल बोर्ड की हेल्पलाइन नंबर 1916 पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 1 जून को भी शिकायत की गई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न तो पानी की गुणवत्ता की जांच की गई और न ही प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों को पीने, खाना बनाने और दैनिक उपयोग के लिए बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, जबकि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट 4 जून को सुनवाई करेगा। हौजखास के एक्स और वाई ब्लॉक में पिछले कई दिनों से गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। इस स्थिति को देखते हुए अदालत से क्षेत्र की जलापूर्ति और सीवर लाइनों का विस्तृत निरीक्षण कराने तथा जहां भी तकनीकी खामियां हों, वहां आवश्यक मरम्मत कार्य तत्काल पूरा कराने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा, याचिका में प्रभावित इलाकों के निवासियों को राहत पहुंचाने के लिए मुफ्त पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है, ताकि लोगों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए स्वच्छ पानी मिल सके। याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि जल आपूर्ति के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए और उसकी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पानी किस कारण से दूषित हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
याचिकाकर्ता अभिएसुमत गुप्ता ने इसे नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित एजेंसियों की मूल जिम्मेदारी है, जबकि दूषित पानी की आपूर्ति लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल रही है। याचिका में कहा गया है कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में गंदे और प्रदूषित पानी की आपूर्ति नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने के निर्देश जारी करने की मांग की है। गौरतलब है कि दिल्ली के कई इलाकों से इन दिनों गंदे और प्रदूषित पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई क्षेत्रों में लोगों ने बदबूदार और मटमैले पानी की आपूर्ति का आरोप लगाया है, जिससे पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली जल बोर्ड के साथ-साथ राज्य सरकार भी विपक्ष के निशाने पर है। विपक्षी दलों ने जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
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