क्योंझर: अपनी मृत बहन की बचत राशि निकालने के लिए उसके कंकाल को बैंक की शाखा तक ले जाने वाले क्योंझर के आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि उन्हें बैंक से पैसे मिल गए हैं, लेकिन ‘हो’ आदिवासी परंपराओं के अनुसार अब उन्हें अपनी बहन का अंतिम संस्कार दूसरी बार करना होगा और पूरे समुदाय के लिए एक भोज का आयोजन करना होगा।
आदिवासी ‘हो’ समाज महासभा के अध्यक्ष गौरा चरण मुंडा ने बताया, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी परंपरा के अनुसार, जो भी शव को दफनाता है, उसे अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करनी पड़ती है। चूंकि शव को दोबारा दफनाया गया है, इसलिए जीतू को ये रस्में फिर से निभानी होंगी।” उन्होंने कहा कि समुदाय इस प्रक्रिया में जीतू के परिवार का मार्गदर्शन करेगा।

दरअसल पटना ब्लॉक के डियानाली गांव के निवासी जीतू मुंडा अपनी अविवाहित बहन द्वारा जमा किए गए 19,000 रुपये निकालने की कोशिश कर रहे थे। उनकी बहन ने अपने बैल बेचकर यह राशि जमा की थी। बहन के पति और इकलौते बच्चे की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, जिससे जीतू ही उनके इकलौते जीवित रिश्तेदार थे। बैंक अधिकारी लगातार मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग कर रहे थे, जिसे बनवाने में 50 वर्षीय जीतू असमर्थ रहे। इसी हताशा में उन्होंने अपनी बहन के अवशेषों को बैंक ले जाने का कदम उठाया।
बैंक ने तीन कानूनी वारिसों के बीच 19,402 रुपये का निपटान किया। इसके अलावा जिला प्रशासन ने रेड क्रॉस फंड से लगभग 30,000 रुपये जारी किए। वहीं इस मामले में मुख्यमंत्री ने राजस्व मंडल आयुक्त (RDC) संग्राम केशरी महापात्र को विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने क्योंझर कलेक्टर, एसपी और ओडिशा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष से एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी है।
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