रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दावा किया है कि उनकी सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में भ्रष्टाचार के उन तमाम रास्तों को बंद करने का काम किया है, जिनकी शिकायतें लगातार मिलती थीं। आबकारी विभाग में एफएल-10 लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने से लेकर कोयला परिवहन में ऑफलाइन ट्रांजिट पास प्रणाली बंद करने और प्रशासनिक सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट व्यवस्था लागू करने जैसे कदम उठाए गए हैं। अब सरकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू करने जा रही है, जहां दर्ज होने वाली शिकायतों का समयबद्ध निराकरण होगा और लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

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सुशासन तिहार पर lalluram.com के स्थानीय संपादक आशीष तिवारी से विशेष बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ प्रदेश की तीन करोड़ जनता तक पहुंचे। इसी सोच के साथ पिछले वर्ष शुरू किए गए सुशासन तिहार को इस बार और व्यापक स्वरूप दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जहां जनता की शिकायतें एकत्र कर उनका निराकरण किया गया था, वहीं इस बार अभियान शुरू होने से पहले ही जिला कलेक्टरों को लंबित राजस्व प्रकरणों के निपटारे के निर्देश दिए गए थे।

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मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक वे 18 जिलों का दौरा कर चुके हैं और हर दिन तीन जिलों में समाधान शिविरों का निरीक्षण करने के बाद समीक्षा बैठक लेते हैं। उनके अनुसार राजस्व मामलों के निपटारे में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और अधिकांश जिलों में लंबित प्रकरण तेजी से कम हुए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में पंचायतों और वार्डों के क्लस्टर बनाकर समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, लाइसेंस, स्वामित्व कार्ड समेत अनेक सेवाएं मौके पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्षों से आबादी भूमि पर निवास कर रहे लोगों को स्वामित्व अधिकार दिए जा रहे हैं और 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में राशन समय पर पहुंच रहा है, बिजली का विस्तार हो रहा है और पेयजल संकट वाले क्षेत्रों में तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने माना कि जल जीवन मिशन में कुछ समस्याएं हैं, लेकिन इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार की कार्यप्रणाली जिम्मेदार रही है। वर्तमान सरकार ने खामियों को दूर करने के लिए कार्रवाई की है और जल जीवन मिशन 2.0 के जरिए अधूरे कार्यों पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ढाई वर्षों में जहां से भी शिकायतें मिलीं, उनकी जांच कराई गई और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। समीक्षा बैठकों में लापरवाही सामने आने पर अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है। उन्होंने कहा कि उनका स्वभाव भले शांत हो, लेकिन जनहित के मामलों में सरकार कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटती।

नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सल हिंसा थी, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, अस्पताल और स्कूल जैसी सुविधाएं दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है और आने वाले वर्षों में वहां के लोगों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की अहम भूमिका होती है, लेकिन वर्तमान विपक्ष केवल विरोध की राजनीति तक सीमित होकर रह गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को भी समाधान शिविरों में जाकर जनता की समस्याएं और उनके समाधान की प्रक्रिया को देखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार और जनता के बीच संवाद और मजबूत होगा तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लक्ष्य को और गति मिलेगी।

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