ODISHA DESK, जाजपुर: ओडिशा के ऐतिहासिक शहर जाजपुर में पवित्र वैतरणी नदी के तट पर स्थित मां बिरजा मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और जागृत शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े किए थे, तब इस स्थान पर माता सती की ‘नाभि’ (Navel) गिरी थी। इसी वजह से इस पवित्र धाम को ‘नाभि पीठ’ या ‘उड्डीयान पीठ’ के नाम से जाना जाता है।
ओडिशा के चार प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों में से जाजपुर को ‘गदा क्षेत्र’ कहा जाता है। आइए जानते हैं मां विरजा मंदिर के कुछ ऐसे अनोखे रहस्य और परंपराएं, जो इसे दुनिया के अन्य सभी शक्तिपीठों से अलग बनाती हैं।
माता की मूर्ति की अद्भुत विशेषताएं
आम तौर पर देश के अन्य हिस्सों में मां दुर्गा की मूर्तियां अष्टभुजा (8 हाथ) या दशभुजा (10 हाथ) वाली होती हैं। लेकिन मां विरजा की मूर्ति की बनावट बेहद अनोखी है:
द्विभुजा महिषामर्दिनी: मां विरजा द्विभुजा (दो हाथों वाली) हैं। वे अपने एक हाथ से महिषासुर की पूंछ को ऊपर उठाए हुए हैं और दूसरे हाथ में थामे त्रिशूल से उसके सीने पर प्रहार कर रही हैं। माता का एक पैर महिषासुर पर और दूसरा पैर उनके वाहन सिंह पर है।
मुकुट में गणेश और शिवलिंग: माता के सिर पर सजे किरीट (मुकुट) में भगवान गणेश, माता सरस्वती, एक नाग और एक छोटा शिवलिंग बना हुआ है। यह अद्भुत दृश्य शाक्त, शैव और गाणपत्य संप्रदाय के अनूठे मिलन को दर्शाता है।
मंदिर की अनोखी परंपराएं और मुख्य आकर्षण
- देवी मां की अनूठी रथयात्रा
हम सभी जानते हैं कि रथयात्रा केवल भगवान जगन्नाथ या विष्णु जी के अवतारों की होती है। लेकिन मां विरजा पूरे भारत की एकमात्र ऐसी देवी हैं, जिनकी रथयात्रा निकाली जाती है। आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि के दौरान मां विरजा की 9 दिनों तक चलने वाली भव्य रथयात्रा होती है।
देवी मां के इस विशेष रथ को ‘सिंहध्वज’ या ‘विजय रथ’ कहा जाता है। यह रथ पूरे 9 दिनों तक मंदिर की परिक्रमा करता है, जिसे देखने देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
- नाभि गया (पितरों का पिंडदान)
मंदिर परिसर के भीतर ‘नाभि गया’ नाम का एक पवित्र कुआं (कूप) स्थित है। सनातन धर्म में पिंडदान और श्राद्ध के लिए तीन स्थानों को सर्वश्रेष्ठ माना गया है— बिहार का गया (शिरो गया), ओडिशा का जाजपुर (नाभि गया) और आंध्र प्रदेश का पीठापुरम (पाद गया)। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। - वैतरणी तीर्थ और वराहनाथ मंदिर
मंदिर के पास बहने वाली पवित्र वैतरणी नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। नदी के दूसरे छोर पर भगवान विष्णु का प्रसिद्ध ‘वराहनाथ मंदिर’ भी स्थित है, जो इस क्षेत्र के धार्मिक महत्व को और बढ़ाता है।
ऐतिहासिक महत्व
राजा ययाति केसरी का संबंध: सोमवंशी राजा ययाति केसरी के शासनकाल में जाजपुर ओडिशा की राजधानी हुआ करता था। राजा ययाति ने इस भूमि पर एक बहुत बड़ा यज्ञ करवाया था, जिसके बाद से इस जगह का नाम ‘जाजपुर’ (यज्ञपुर से अपभ्रंश) पड़ा।
शारदीय नवरात्रि के दौरान सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि को यहाँ लाखों भक्तों का तांता लगता है। ऐसा माना जाता है कि मां विरजा के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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