लोगों का मूल्यांकन उनकी वाणी, चंचलता और बाहरी व्यवहार से करना एक भूल हो सकती है। आमतौर पर जो व्यक्ति अधिक बोलता है उसे हम आत्मविश्वासी और जो शांत हो उसे संकोची या कमजोर समझ लेते हैं। लेकिन बहुत संभव है कि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग हो सकती है।

ऊपरी तौर पर समुद्र की सतह जितनी शांत दिखाई देती है गहराई मे उतनी ही हलचल रहती है। कुछ लोग अपनी चाहतों, भावनाओं, विचारों और प्रतिभा को अपने भीतर संजोकर रखते हैं उसका प्रदर्शन नहीं करते। लेकिन यह भी हो सकता है कि उनकी यह खामोशी, खालीपन नहीं बल्कि विचारों की भीड़, अनुभवों की परिपक्वता और भावनाओं की गहराई हो।

जो लोग बोलने से अधिक सुनने वाले होते हैं, प्रतिक्रिया देने से पहले विचार करने वाले होते हैं और खुद को सिद्ध करने के बजाय अपने कर्मों को बोलने देते हैं। ऐसे लोगों की शांति को कमजोरी समझना वैसा ही है जैसे समुद्र को उसकी शांत सतह देखकर उथला समझ लेना। याद रहे गहरी नदियाँ सबसे कम शोर करते हुए बहती हैं। प्रदर्शनप्रिय आज के युग में हर व्यक्ति स्वयं को दिखाने की होड़ में है ऐसे में शांत रहकर अपनी पहचान बनाना एक अलग ही प्रतिभा है। किसी व्यक्ति को उसके मौन से नहीं बल्कि उसके विचारों और कर्मों से परखना चाहिए।

“गुणाः पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्गं न च वयः।” यह एक प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित है जिसका अर्थ है कि गुणवान या गुणी व्यक्तियों में उनके गुण ही आदर या पूजा का मुख्य आधार होते हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता कि गुणी व्यक्ति स्त्री है या पुरुष और उनकी आयु कितनी है।

“Still waters run deep” इंग्लिश का यह Proverb केवल जल की प्रकृति नहीं बल्कि मनुष्य के व्यक्तित्व की एक गहरी सच्चाई को भी अभिव्यक्त करती है।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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