हेमंत शर्मा, इंदौर। धार भोजशाला मामले में 15 मई 2026 को इंदौर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भी जमीनी तस्वीर नहीं बदली है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) पर सीधे-सीधे हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल और एडवोकेट विनय जोशी ने ASI को मेल और पत्र भेजकर कहा है कि कोर्ट के आदेश का पूर्ण पालन अब तक नहीं हुआ।
टिकट और व्यवस्थाओं में अब तक बदलाव नहीं
सबसे बड़ा सवाल उस टिकट को लेकर खड़ा हो रहा है जिस पर आज भी “कमाल मौलाना मस्जिद” लिखा हुआ है। हिंदू पक्ष का कहना है कि जब हाईकोर्ट भोजशाला को मंदिर मान चुका है, तो फिर टिकट और व्यवस्थाओं में अब तक बदलाव क्यों नहीं किया गया। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का आरोप है कि श्रद्धालुओं को आज भी एक रुपए का टिकट लेकर दर्शन करने पड़ रहे हैं, जबकि फैसले के बाद व्यवस्थाओं में बदलाव होना चाहिए था। संगठन ने इसे श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है।
भोजशाला परिसर के कई कमरे अब भी बंद
मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने आरोप लगाया कि ASI उत्खनन के दौरान मिली देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और हिंदू धार्मिक अवशेषों को अब भी एक कमरे में पीली पन्नी से ढंककर रखे हुए है। उनका कहना है कि इन प्रतिमाओं को विधिवत स्थापित किया जाना चाहिए था ताकि श्रद्धालु दर्शन और पूजन कर सकें, लेकिन ASI इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा।इतना ही नहीं, भोजशाला परिसर के कई कमरे अब भी बंद बताए जा रहे हैं। हिंदू पक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सभी कमरे खोले जाएं और पूरे परिसर को श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराया जाए।
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मैं बाइट के लिए ऑथराइज्ड नहीं
इस पूरे मामले में जब ASI मांडव के अधिकारी प्रशांत पाटणकर से सवाल किया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कई कमरे क्यों नहीं खोले गए, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला रहा। आरोप है कि उन्होंने फोन पर कहा -“आप कहां मंदिर-वंदिर के चक्कर में पड़े हो… भोपाल से जो तय होगा वही होगा… मैं बाइट के लिए ऑथराइज्ड नहीं हूं।” इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया।
आदेशों का पालन नहीं हुआ तो जन आंदोलन
अब सवाल सीधे ASI की कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे हैं। क्या हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जमीनी अमल सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगा? क्या श्रद्धालुओं की मांगों को इसी तरह टाला जाएगा? और क्या मीडिया के सवालों पर जिम्मेदार अधिकारी इसी तरह जवाब देंगे? भोजशाला को लेकर अब विवाद कोर्ट के फैसले से आगे बढ़कर उसके क्रियान्वयन पर आ गया है। हिंदू पक्ष ने साफ चेतावनी दी है कि अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ तो कानूनी लड़ाई के साथ बड़ा जन आंदोलन भी किया जाएगा।

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