श्रीनगर में 13 जुलाई को मनाए जाने वाले शहीद दिवस से एक दिन पहले प्रशासन ने पुराने शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नक्शबंद साहिब कब्रिस्तान की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों को कॉन्सर्टिना तार, प्लास्टिक बैरिकेड्स, जीआई शीट्स और खंभों से बंद कर दिया गया है। सोमवार को नेताओं के प्रस्तावित मार्च और श्रद्धांजलि कार्यक्रम को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

महबूबा मुफ्ती को हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती को शहीद दिवस से पहले हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा करते हुए कहा कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के नजरबंद किया गया है। उन्होंने प्रशासन पर विरोध की आवाज दबाने और पुलिस के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया।

पिछले साल उमर अब्दुल्ला ने फांदा था कब्रिस्तान का गेट

प्रशासन की सख्ती के पीछे पिछले वर्ष की घटना को भी अहम वजह माना जा रहा है। 13 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने कब्रिस्तान का मुख्य द्वार बंद कर दिया था। इसके बाद उमर अब्दुल्ला बाड़ फांदकर अंदर पहुंचे और उनके पीछे कई नेता व समर्थक भी कब्रिस्तान में दाखिल हो गए। बढ़ते दबाव के बाद पुलिस को मुख्य गेट खोलना पड़ा था।

पिछले साल कई नेता भी हुए थे नजरबंद

बीते वर्ष शहीद दिवस से पहले उमर अब्दुल्ला समेत कई नेताओं को भी हाउस अरेस्ट किया गया था। बावजूद इसके, नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ऑटो-रिक्शा से खानयार क्रॉसिंग तक पहुंचे, जबकि मंत्री सकीना इटू स्कूटर पर उनके साथ कब्रिस्तान पहुंची थीं।

क्या है 13 जुलाई शहीद दिवस का इतिहास?

13 जुलाई 1931 को श्रीनगर की सेंट्रल जेल के बाहर प्रदर्शन कर रहे 22 लोगों की डोगरा सेना की गोलीबारी में मौत हो गई थी। जम्मू-कश्मीर में इस दिन को लंबे समय तक शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। हालांकि, वर्ष 2020 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद प्रशासन ने 13 जुलाई को राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) की सूची से हटा दिया था। आज भी यह दिन प्रदेश की राजनीति और इतिहास में विशेष महत्व रखता है।

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