Lalluram Desk. सनातन परंपरा में तृतीया तिथि का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि में कुछ तिथियां पर्व और व्रत के रूप में विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन्हीं में अक्षय तृतीया, हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज प्रमुख हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में तीज पर्वों की सूची और नामों में कुछ अंतर भी देखने को मिलता है। इस बीच भाद्रपद शुक्ल तृतीया यानी 14 सितंबर को हरतालिका तीज का कठिन व्रत रखा जा रहा है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। जबकि अविवाहित कन्या मनचाहा वर पाने की कामना से पूजा करती हैं।
साल में आने वाली प्रमुख तीज
अक्षय तृतीया
वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया या आखा तीज कहा जाता है। इस दिन दान, स्नान, जप और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है और इस दिन शुभ कार्यों के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं मानी जाती।
हरियाली तीज
श्रावण शुक्ल तृतीया को हरियाली तीज मनाई जाती है। सावन की हरियाली और शिव-पार्वती की आराधना से जुड़ा यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के बीच लोकप्रिय है। महिलाएं व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं।
कजरी तीज
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सुहाग, दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली से जुड़ा है। कई क्षेत्रों में इस दिन नीमड़ी माता की पूजा करने की भी परंपरा है।
हरतालिका तीज
भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इसे तीज के कठिन व्रतों में प्रमुख माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।
माघ शुक्ल तृतीया
माघ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को भी धार्मिक साधना और पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस तिथि से जुड़े व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों की परंपराएं मिलती हैं।
हरतालिका तीज का कठिन व्रत
हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से जोड़ा जाता है। कथा के अनुसार, देवी उमा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या कर रही थीं। उनकी सखियां उन्हें अपने साथ वन में ले गईं, ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध कहीं और न हो। वन में पार्वती जी ने शिवजी की आराधना और तप किया। इसी प्रसंग से हरतालिका नाम जुड़ा माना जाता है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से हरतालिका तीज का व्रत करती है ।
निर्जला व्रत और रात्रि जागरण
हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में गिना जाता है। महिलाएं परंपरागत रूप से इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात में जगरण कर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती है। कई स्थानों पर चारों पहर पूजा और आरती करने की भी परंपरा है। व्रत का पारण अगले दिन पूजा-विधान पूरा करने के बाद किया जाता है।
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