दीपक कौरव, नरसिंहपुर। जरा सोचिए, आप सड़क पर जा रहे हों और अचानक पुलिस आपको रोक ले… धड़कनें बढ़ना तो लाज़मी है। लेकिन तब क्या हो जब पुलिस ही पुलिस को रोक ले और सरेराह उसकी ‘क्लास’ लगा दे? जी हां ऐसा ही एक गजब नजारा मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में देखने को मिला, जहां ‘खाकी’ के घमंड पर ‘खाकी’ का ही डंडा ऐसा चला कि देखने वाले देखते रह गए।
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ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस जब खुद बिना हेलमेट के ‘रॉबिनहुड’ बनकर घूम रही थी तो मैडम सिंघम ने बीच चौराहे पर ही उनकी ऐसी बत्ती गुल की कि उन्हें लेने के देने पड़ गए!

जब सड़क पर उतरीं ‘लेडी सिंघम’, पुलिसवालों के छूटे पसीने!
मामला नरसिंहपुर जिला मुख्यालय के कंट्रोल रूम के पास का है। यहां यातायात थाना प्रभारी ममता तिवारी अचानक पूरे ‘सिंघम अवतार’ में सड़क पर आ धमकीं। मैडम ने जैसे ही चेकिंग शुरू की, आम जनता तो नियम कायदों में आ गई, लेकिन तभी बाइक पर सवार होकर कुछ पुलिस के जवान बिना हेलमेट लगाए बड़े टशन में वहां से गुजरे।
बस फिर क्या था! मैडम ने आव देखा न ताव, तुरंत गाड़ी रुकवाई। ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों ने सोचा होगा कि ‘अपनी ही तो पुलिस है, छोड़ देगी’, लेकिन ममता मैडम के इरादे कुछ और ही थे। उन्होंने बीच सड़क पर ही नियम तोड़ने वाले जवानों की ऐसी क्लास लगाई कि बेचारे बगलें झांकने लगे।

खाकी पर चला ‘चालानी तीर’, जनता बोली- ‘वाह मैडम, मौज कर दी!’
मैडम तिवारी ने साफ कर दिया कि वर्दी का रौब घर पर छोड़कर आइए, सड़क पर कानून सबके लिए बराबर है। उन्होंने तुरंत रसीद कट्टा निकाला और ऑन-ड्यूटी पुलिस के जवानों के भी तड़ातड़ चालान काट दिए।
सड़क किनारे खड़ी जनता जो अमूमन पुलिस की चेकिंग से डरती है, वो यह नजारा देखकर तालियां बजाने लगी। लोगों के मुंह से बस एक ही बात निकल रही थी- वाह मैडम, कानून हो तो ऐसा! आज तो खाकी का ही बैंड बज गया।

सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर है बॉस, कलेक्ट्री भी नहीं बचेगी!
इस अनोखी और सख्त कार्रवाई के बाद यातायात प्रभारी ममता तिवारी ने कड़क लहजे में बताया कि यह कोई मजाक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की बैठक में साफ निर्देश दिए गए हैं कि सभी सरकारी विभागों में यातायात नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
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मैडम ने साफ कहा कि इस महा-अभियान की शुरुआत हमने सबसे पहले पुलिस विभाग और कलेक्ट्रेट से की है ताकि जनता को संदेश मिले। इस अजब-गजब चेकिंग के दौरान नियम तोड़ने वाले सरकारी और गैर-सरकारी बाबुओं के कुल 68 चालान काटकर उनके हाथ में थमा दिए गए।


