हेमंत शर्मा, इंदौर। देशभर का ट्रांसपोर्ट सेक्टर इन दिनों दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें और दूसरी तरफ कई क्षेत्रों में डीजल की उपलब्धता की समस्या ने ट्रांसपोर्टरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी के चलते ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने माल भाड़े में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है।

ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के चेयरमैन सी एल मुकाती के अनुसार, लंबे समय से माल भाड़े की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई थी, जबकि इस दौरान डीजल के दाम, टायर, पार्ट्स, युरिया, टोल टैक्स और संचालन लागत लगातार बढ़ती रही। बढ़ती महंगाई का असर भी ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे ट्रांसपोर्टरों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। चेयरमेन ने बताया कि आयात-निर्यात गतिविधियों में कमी आने से ट्रकों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। कई वाहन लंबे समय तक खड़े रहने को मजबूर हैं, जिसके कारण वाहन मालिकों को बैंक की किश्तें चुकाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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समय पर न मिलने से बड़ा बदलाव

उन्होंने कहा कि परिवहन व्यापार में डीजल की समय पर उपलब्धता नहीं होने से भी बड़ा बदलाव आया है। पहले इंदौर से दिल्ली तक ट्रक पहुंचने में जहां 2 से 3 दिन का समय लगता था, वहीं अब यही सफर पूरा करने में लगभग दोगुना समय लग रहा है। बढ़े हुए समय के कारण ईंधन खर्च, ड्राइवरों का खर्च और अन्य परिचालन लागत बढ़ रही है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए माल भाड़े में बढ़ोतरी आवश्यक हो गई है, ताकि ट्रांसपोर्ट कारोबार को आर्थिक रूप से संतुलित रखा जा सके।

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डीजल की उपलब्धता सीमित होने पर बढ़ेगी महंगाई

ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि यदि लागत में लगातार बढ़ोतरी होती रही और राहत नहीं मिली, तो आने वाले समय में परिवहन क्षेत्र की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। साथ सरकार के आदेश अनुसार वाहनों को 24 घंटे मे 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। “देश की अर्थव्यवस्था का पहिया ट्रांसपोर्ट है। यदि ट्रकों के लिए डीजल की उपलब्धता सीमित होती है, तो इसका प्रभाव केवल परिवहन पर नहीं बल्कि उद्योग, व्यापार, कृषि और आम जनता तक पहुंचने वाली हर वस्तु पर पड़ता है। जिससे आर्थिक नुकसान होगा महंगाई बढ़ेगी आम जनता को परेशानी होगी।

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