प्रदीप मालवीय, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में होली का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। उत्सव की शुरुआत भस्म आरती से हुई। जहां बाबा महाकाल को विशेष रूप से हर्बल गुलाल अर्पित किया गया और शक्कर की मालाओं से उनका दिव्य श्रृंगार हुआ। सुरक्षा की दृष्टि से इस बार श्रद्धालुओं द्वारा गुलाल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। इसके बावजूद भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मंदिर परिसर में परंपरा अनुसार विधिवत होलिका दहन किया गया, जिसकी अग्नि के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु साक्षी बने। हालांकि, इस वर्ष होली के उल्लास पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। आज शाम 6:32 बजे से लगने वाले 17 मिनट के चंद्र ग्रहण के कारण मंदिर की पूजा पद्धति और समय सारिणी में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए है। सूतक काल के दौरान भगवान का स्पर्श पूर्णतः वर्जित रहेगा। ग्रहण के उपरांत संपूर्ण मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा, जिसके बाद ही संध्या आरती संपन्न होगी। विशेष रूप से बाबा महाकाल को लगाया जाने वाला भोग भी ग्रहण काल समाप्त होने और शुद्धिकरण की प्रक्रियाओं के पश्चात ही अर्पित किया जाएगा।

दुनिया में सबसे पहले महाकाल मंदिर में होलिका दहन
उज्जैन के महाकाल मंदिर में होली के त्यौहार की शुरुआत हो गई है। यहां परंपरा अनुसार संध्या आरती में बाबा महाकाल को रंग लगाया गया। श्रद्धालु और पंडे-पुजारियों ने आरती में लीन होकर अबीर गुलाल और फूलों के साथ होली खेली। आरती के बाद मंदिर परिसर में मंत्रोचारण के साथ होलिका का पूजन किया। इसके बाद होलिका दहन किया गया।
इस अवसर पर देश-विदेश से कई भक्त उज्जैन में मनाई जाने वाली इस होली को देखने के लिए आते है। आरती के समय बाबा के भक्तों पर भी होली का रंग खूब चढ़ता है, लेकिन दो वर्ष पहले होली पर्व पर गर्भगृह में अग्निकांड होने से भक्तों को अबीर गुलाल से दूर रखा गया। महाकाल मंदिर में एक दिन पहले होली का पर्व मनाने की परंपरा आदि अनादिकाल से चली आ रही है। यहां सबसे पहले बाबा महाकाल के आंगन में होलिका का दहन होता है और उसके बाद शहर भर में होली मनाई जाती है।
4 मार्च से आरती के समय में होगा बदलाव
04 मार्च 2026 से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से अश्विन पूर्णिमा तक आरतीयों के समय में परंपरानुसार परिवर्तन लागू होगा। नई समय-सारिणी के मुताबिक, भस्म आरती प्रातः 4 से 6 बजे तक, दद्योदक आरती 7 से 7:45 बजे तक, भोग आरती 10 से 10:45 बजे तक, संध्या पूजन 5 से 5:45 बजे तक, संध्या आरती 7 से 7:45 बजे तक और शयन आरती रात्रि 10:30 से 11 बजे तक संपन्न होगी।

