प्रदीप मालवीय, उज्जैन। बाबा महाकाल की पवित्र नगरी उज्जैन में भारतीय संस्कृति और भक्ति योग परंपरा का एक बेहद अनुपम और अद्भुत नजारा देखने को मिला । मोक्षदायिनी मां शिप्रा के पावन तट पर स्थित आश्रम में गुरुदेव डॉ. ओमानंद महाराज के सानिध्य में यूरोप से आए तीन विदेशी जोड़ों ने हिंदू रीति-रिवाज और पूर्ण वैदिक पद्धतियों का पालन करते हुए विवाह रचाया । इस मांगलिक आयोजन की सबसे विशेष बात यह रही कि भारतीय परंपरा में प्रवेश करते ही इन सभी विदेशी साधकों को नए आध्यात्मिक सनातन नाम भी प्रदान किए गए ।

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इस पावन विवाह समारोह में इटली की ईवा (मां दर्पण आनंद) का विवाह इटली के ही मैसिमिलियानो (बलराम आनंद) के साथ संपन्न हुआ । वहीं इटली की जेसिका (मां सीता आनंद) ने इटली के लुका (राम आनंद) के साथ सात फेरे लिए । इसके अलावा स्पेन की इनमा (मां शांति आनंद) संग इंग्लैंड के मार्क (प्रकाशानंद) परिणय सूत्र में बंधे । आश्रम परिसर में आयोजित इस समारोह में शादी के उन तमाम रीति-रिवाजों का पूरी निष्ठा और विधि-विधान से पालन किया गया, जो एक पारंपरिक हिंदू परिवार अपने घर में आयोजित होने वाले विवाह कार्यों में निभाता है । समारोह के दौरान आश्रम में भारतीय परंपरा का हर एक रंग पूरी भव्यता से झलकता नजर आया । वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब विदेशी युगलों ने अग्नि के समक्ष सात फेरे लिए, तब वहां मौजूद भारतीय बारात और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था । ढोल-नगाड़ों और ढोलक की थाप पर भारतीय बाराती झूमते और नाचते नजर आए, जिसने विदेशी मेहमानों को भी भारतीय उत्सव प्रियता और आत्मीयता का गहरा अहसास कराया ।

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इस अवसर पर डॉ. ओमानंद गुरु ने सनातन संस्कृति की गहराई और विवाह संस्कार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पाश्चात्य देशों में विवाह को एक कानूनी अनुबंध के रूप में देखा जाता है, जबकि भारतीय दर्शन में विवाह केवल एक समझौता नहीं, बल्कि आत्माओं का दिव्य संबंध और 16 संस्कारों में से 15वां सबसे पवित्र ‘पाणिग्रहण संस्कार’ है, जो जीवन में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है । उन्होंने बताया कि ये सभी जोड़े उनके पास योग और ध्यान की शिक्षा लेने आए थे । भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कारों और आपसी सम्मान से प्रभावित होकर ही इन्होंने सनातन परंपरा के अनुसार विवाह करने का निर्णय लिया । धर्मनगरी उज्जैन में हुआ यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति की अटूट स्वीकार्यता का नया अध्याय लिख गया ।

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