सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. लोकसभा में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा प्रदेश में 22 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद किए जाने का आरोप लगाए जाने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए सरकार का पक्ष रखा है.

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‘किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद करने का निर्णय नहीं’

संदीप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद करने का निर्णय नहीं लिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी विद्यालय पहले की तरह संचालित हो रहे हैं. सरकार केवल ऐसे विद्यालयों में, जहां छात्र संख्या बेहद कम है, बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उन्हें निकटतम विद्यालय में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अपना रही है.

उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों से कक्षाएं दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित की जाएंगी, उन भवनों का उपयोग बंद नहीं होगा. वहां पहली बार प्री-प्राइमरी यानी बाल वाटिका की कक्षाएं संचालित की जाएंगी, जिससे प्रारंभिक शिक्षा को और मजबूत बनाया जा सके.

अखिलेश जनता को भ्रमित कर रहे हैं

बेसिक शिक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जनता को भ्रमित करने की राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में शिक्षा व्यवस्था पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के कारण लगातार विवादों में रही. उन्होंने 2014 के यूपीएसईई साल्वर गैंग, यूपी-सीएलएटी पेपर लीक और 2015 की उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया.

योगी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए संदीप सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश किया है. उनके अनुसार, समाजवादी सरकार के समय शिक्षा का बजट करीब 28 हजार करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 1.13 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.

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सरकार का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विद्यालय बंद करना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना और प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है. ऐसे में स्कूल बंद किए जाने के आरोप पूरी तरह निराधार और जनता को गुमराह करने की कोशिश हैं.