लखनऊ। राजधानी के कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 लोगों की जान चली गई है। मरने वाले लोगों में ज्यादातर 20 से 30 साल के स्टूडेंट्स हैं। जिस बिल्डिंग में यह दुखद घटना हुई है, उसे 2016 में गिराने का आदेश जारी किया गया था लेकिन दो माह से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।
बिल्डिंग में सुरक्षा मानकों की अनदेखी
शुरुआती जांच में लखनऊ अग्निकांड में वही खामियां मिली हैं जो मालवीय नगर अग्निकांड में मिली थी। इस तीन मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को बिना फायर एनओसी के चलाया जा रहा था। बिल्डिंग में सारे नियमों की धज्जियां उड़ाई गई और सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरती गई। जिसका खामियाजा 15 छात्रों को अपनी जान देकर भरना पड़ा।
बाहर आने जाने के लिए एक ही रास्ता
छानबीन के दौरान पता चला कि अलीगंज के इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में अंदर और बाहर आने-जाने के लिए केवल एक ही सकरा रास्ता था। सारे नियमों को ताक पर रखकर इस इकलौते रास्ते के ऊपर 7 पैनल, 2 एग्जॉस्ट फैन और इलेक्ट्रिक कंट्रोल पैनल लगा दिए गए थे। साथ ही इस पूरी बिल्डिंग में एक भी इमरजेंसी गेट नहीं था, जिसके चलते आग लगने पर धुआं फैलने के कारण दूसरी मंजिल पर फंसे लड़के-लड़कियां बाहर नहीं निकल पाए।
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जमीन मालिकों ने किया खेला
बताया जा रहा है कि जमीन के मालिकों ने निर्माण कार्य से पहले खेला किया। उन्होंने प्रशासन से रिहायशी बिल्डिंग का नक्शा पास करवाया और यहां कमर्शियल कंपलेक्स खड़ा कर दिया। जिसकी जानकरी लगते ही लखनऊ प्रधिकरण ने एक्शन लिया तो मालिक अदालत पहुंच गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने ध्वस्तीकरण के आदेश को निरस्त कर दिया। जांच के दौरान कांपलेक्स के बेसमेंट में गारमेंट्स का एक बड़ा अवैध गोदाम भी पाया गया।
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बिल्डिंग मालिकों का विवादित रिकॉर्ड
वहीं जांच के दौरान बिल्डिंग के सह-मालिक सुरेंद्र शुक्ल का पुराना विवादित रिकॉर्ड भी सामने आया है। सुरेंद्र शुक्ल का नाम साल 2015 में हुए सीपीएमटी पेपर लीक मामले में प्रमुख रूप से उछला था। उन पर बेटी को परीक्षा में पास कराने के लिए पेपर लीक कराने का आरोप लगा था। साथ ही उसने परीक्षा केंद्र में बेटी को विशेष सुविधाएं दिलाने की कोशिश की थी। उसके खिलाफ FIR भी हुई थी लेकिन एसटीएफ ने पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण उसे राहत दे दी थी।
जानिए पूरा घटनाक्रम
- दोपहर 2:15 बजे: अलीगंज के सेक्टर डी के चार मंजिला कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई। पहले लोगों ने आग पर काबू का प्रयास किया।
- दोपहर 2:30 बजे: आग को लगातार बढ़ती देख फायर ब्रिगेड को घटना की जानकारी दी गई।
- दोपहर 3.10 बजे: फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी मौके पर पहुंची। आग की भयावहता की जानकारी विभाग को दी गई। धीरे-धीरे दमकल की 13 गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया। आग पर काबू का प्रयास शुरू किया गया।
- शाम 6:30 बजे: फायर ब्रिगेड की ओर से आग पर काबू पाने और हालात के सामान्य होने की जानकारी दी गई। आग लगने से 15 युवाओं की मौत का मामला सामने आया।
इसके अलावा सुरेंद्र शुक्ल और उसके भाई वीरेंद्र शुक्ल पर किसानों से कौड़ियों के भाव सस्ती जमीन खरीदकर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग करने और करोड़ों रुपये कमाने के आरोप लगते रहे हैं। इस अग्निकांड वाली इमारत के दूसरे मालिक वीरेंद्र शुक्ल ही बताए जा रहे हैं।

