लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती (69 thousand teachers recruitment) का मामला एक बार फिर तूल पकड़ने लगा है. एक बार फिर सारे अभ्यर्थी प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं. सोमवार यानी 18 मई को सीएम आवास का घेराव करेंगे. मामले में 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. जहां योगी सरकार अपना पक्ष रखेगी. अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार प्रकरण में कोई पहल नहीं कर रही है, जिसकी वजह से मामला अटका पड़ा है.

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बता दें कि अभ्यर्थी बीते 3-4 सालों से 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षण महा घोटाले का आरोप लगा रहे हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जून 2020 और जनवरी 2022 की चयन सूचियों को रद्द कर दिया था. साथ ही यूपी सरकार को निर्देश दिया था कि वह 2019 में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा (एटीआरई) के आधार पर 69 हजार शिक्षकों के लिए नई चयन सूची तीन महीने के भीतर जारी करे. इसको लेकर स्थिति अधर में अटकी हुई है. इसी वजह से अभ्यर्थियों में सरकार के प्रति नाराजगी है.

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ये है पूरा मामला

दरअसल, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कार्यकाल में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का विज्ञापन निकाला गया था. जिसके लिए पात्र अभ्यर्थी जिन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET पास किया था उन्होंने आवेदन किया. जिसके बाद मेरिट तैयार की गई और पात्रों को भर्ती कर लिया गया. लेकिन मामले में पेंच तब फस गया जब आरक्षित चयनित अभ्यर्थियों ने सूची पर आरक्षण नीति का पालन नही करने का आरोप लगाया. जिसके बाद इस मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी कोर्ट में गए. जहां पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकार से सूची को बदलकर नई सूची लागू करने को आदेशित किया. तब तक सामान्य वर्ग के चयनित अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर चले गए. जहां पर सुनवाई होनी है.

घरना प्रदर्शन से कचहरी तक का सफर

69 हजार शिक्षक भर्ती के पिछड़ा वर्ग अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में शुरू से ही दोष था. जबकि सरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चाहती तो लागू भी कर सकती थी. बावजूद इसके सरकार ने ढंग से इसकी पैरवी नहीं की जिसके कारण मामला फंसता जा रहा है. हम लोग पिछले 4 सालों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन न्याय नहीं मिल पा रहा है.