गोरखपुर. बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट, गोरखपुर की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं की भूमिका को लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया. उन्होंने कहा कि अधिवक्ता केवल मुकदमे नहीं लड़ते, बल्कि सामान्य नागरिक के विश्वास के प्रतीक, विधिक सलाहकार और संविधान के सच्चे प्रहरी के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधि का शासन तभी स्थापित होता है, जब न्याय गुणवत्तापूर्ण, सर्वसुलभ और समयबद्ध हो. इन तीनों उद्देश्यों को पूरा करने में अधिवक्ताओं की सबसे अहम भूमिका होती है. उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में वकीलों का योगदान हमेशा केंद्रीय रहा है.
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अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार को लेकर विवाद हुआ, तब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की अभिव्यक्ति बताते हुए कार्यक्रम में शामिल होने का निर्णय लिया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वयं एक अधिवक्ता थे और उनकी स्मृति को सम्मान देने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना की है.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत अब दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और भारत के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी. उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति कुछ देशों को रास नहीं आ रही है और देश को कमजोर करने के लिए विभिन्न प्रकार के षड्यंत्र किए जाएंगे.
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उन्होंने आशंका जताई कि सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज में विभाजन और विद्वेष फैलाने की कोशिश होगी. साथ ही न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाने के प्रयास किए जाएंगे. ऐसे समय में अधिवक्ता समुदाय की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. उन्होंने वकीलों से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास मजबूत करने और संविधान के मूल्यों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.


