लखनऊ. कहते हैं न सियासत का ऊंट कब किस करवट बैठ जाए, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है. ऐसी एक तस्वीर यूपी के सियासी गलियारों से भी सामने आई है. निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद और सपा नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के हुई मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म था कि निषाद पार्टी आगामी चुनाव में भाजपा का साथ छोड़कर बेहतर विकल्प की तलाश कर रही है. हालांकि, संजय निषाद ने खुद इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया है और भाजपा के साथ गठबंधन में रहने की बात कही है. उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले खुद कांग्रेस के साथ सीट बंटवारा कर लें, फिर निषाद पार्टी को मिलने वाली सीटों के बारे में सोचें.
इसे भी पढ़ें- आप जैसे गुंडों को उत्तर प्रदेश से…चंद्रशेखर आजाद रावण का बड़ा बयान, विरोधियों को चेतावनी देते हुए कह दी बड़ी बात
संजय निषाद ने कहा कि जिनके घर शीशे के बने होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते. बेहतर होगा कि सपा के अनपढ़ और लठैत निषाद पार्टी के भविष्य पर अनर्गल टीका-टिप्पणी करने और अफवाह फैलाने की बजाय अपने गिरेबान में झांकें. निषाद पार्टी को मिलने वाली सीटों पर व्यर्थ समय गंवाने के बजाय पहले वे कांग्रेस के साथ बैठकर अपनी सीटों का बंटवारा कर लें.
उन्होंने कहा कि सपा के अपने लोग टूटने की कगार पर हैं. निषाद पार्टी को सपा की किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है, सच तो यह है कि सपा खुद अब तक कांग्रेस की बैसाखी का जुगाड़ नहीं कर पाई है. एनडीए में निषाद पार्टी का गठबंधन, बराबरी और हिस्सेदारी का गठबंधन है. कसरवल कांड में हमारे निर्दोष भाइयों पर गोलियां चलवाने वाले सपा नेता यह न भूलें कि निषाद समाज अपने शहीदों का बलिदान और उनका जुल्म कभी भुला नहीं है, जिन्होंने हक मांगने पर गोलियां चलवाईं, वे आज समाज के हितैषी बनने का ढोंग न करें.
इसे भी पढ़ें- यूथ कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा! अखिलेश यादव का सरकार पर हमला, 27 के चुनाव में युवाओं की भूमिका अहम बताते हुए दिया बड़ा बयान
संजय निषाद ने ये भी कहा कि मछुआरों के खून में राजनीति और स्वाभिमान है. यह समुदाय सिर्फ बराबरी की भागीदारी में विश्वास रखता है. मुगलों और अंग्रेजों से लोहा लेने वाले इस वीर समाज ने कभी किसी के लिए केवल दरी बिछाने की राजनीति नहीं की. डॉ. संजय निषाद के राजनीतिक भविष्य की चिंता करने के बजाय सपा पहले अपना वजूद बचाए. सवाल यह नहीं है कि संजय निषाद कहां जाएंगे, सवाल यह है कि खुद शिवपाल यादव जी और रामगोपाल यादव जी कहां जाएंगे? सपा लगातार सिकुड़ रही है और निषाद पार्टी का जनाधार निरंतर बढ़ रहा है.



