लखनऊ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद एवं उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले में नए सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम के जरिए जनता को भ्रमित कर वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सभी जानते हैं कि असली अपराधी कहां है

प्रमोद तिवारी ने कहा कि मामले के वास्तविक जिम्मेदार अयोध्या में नहीं हैं और सभी जानते हैं कि असली अपराधी कहां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई रसूखदार लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

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धार्मिक परंपराओं के अनुरूप प्राण प्रतिष्ठा नहीं की गई

उन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय मंदिर का निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा नहीं हुआ था। उन्होंने दावा किया कि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप प्राण प्रतिष्ठा नहीं की गई और इस संबंध में शंकराचार्यों की सलाह को भी नजरअंदाज किया गया। तिवारी ने कहा कि इसका राजनीतिक असर भाजपा को लोकसभा चुनाव में झेलना पड़ा।

कांग्रेस नेता ने मांग की कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और किसी भी स्तर पर उन्हें संरक्षण न दिया जाए।

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इसके अलावा प्रमोद तिवारी ने ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून किसी भी देश को दूसरे देश में जाकर निर्दोष लोगों की हत्या करने का अधिकार नहीं देता। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का निर्णय संयुक्त राष्ट्र के दायरे में होना चाहिए और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की उन्होंने कड़े शब्दों में निंदा की है।