सुल्तानपुर. सिस्टम की लापरवाही ने 4 साल पहले एक जिंदा इंसान को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया था. 4 साल तक खुद को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद अब खत्म हो गई है. कोर्ट ने सरकारी दस्तावेजों में 4 साल बाद फर से जिंदा कर दिया है. हालांकि, यह पहली दफा नहीं है, जब योगी सरकार के गैर जिम्मेदार अधिकारियों ने ऐसी गलती की है. इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं. जो न सिर्फ अधिकारियों के कामकाज पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि सीएम योगी के सुशासन वाले दावे पर भी प्रश्न चिन्ह है.

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बता दें कि पूरा मामला सुल्तानपुर के बल्दीराय तहसील का है. जहां 2 पक्षों के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. जिसे लेकर दोनों के बीच कानूनी लड़ाई भी लड़ी जा रही थी. इस बीच देवआनंद ने राम प्रसाद के मृत होने का दावा करते हुए अधिकारी को भ्रमित किया. जिसके बाद राजस्व निरीक्षक ने राम प्रसाद को राजस्व के दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया.

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वहीं अब इस मामले की सुनवाई तहसीलदार अदालत में हुई. जांच और गवाहों के आधार पर अदालत ने पाया कि राम प्रसाद जिंदा हैं. मृतक कोई और था. जिसके बाद कोर्ट ने 4 साल पुराने आदेश को निरस्त कर दिया और राम प्रसाद को सरकारी कागजों में फिर से जिंदा कर दिया. साथ ही उनका नाम खतौनी में भी दर्ज करने के निर्देश दिए.