लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू होकर 6 अगस्त तक चलेगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में चार दिवसीय मानसून सत्र के आयोजन को मंजूरी दे दी गई.

इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों, वित्तीय प्रस्तावों और प्रशासनिक विषयों को सदन के पटल पर रखेगी. संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी आधिकारिक जानकारी दी.

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सरकार रखेगी विकास और योजनाओं का रिपोर्ट कार्ड

सरकार मानसून सत्र में विभिन्न विभागों से जुड़े विधायी कार्यों के साथ प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी सदन में प्रस्तुत करेगी. माना जा रहा है कि सरकार बुनियादी ढांचे, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई अहम विषयों पर अपनी उपलब्धियां गिनाएगी. वित्तीय मामलों से जुड़े आवश्यक प्रस्तावों पर भी चर्चा और अनुमोदन की संभावना है.

विपक्ष ने सरकार को घेरने की बनाई रणनीति

दूसरी ओर विपक्ष भी पूरी तैयारी के साथ सदन में उतरने जा रहा है. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण, जौहर यूनिवर्सिटी विवाद, पेपर लीक, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बना चुके हैं. माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सदन में तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं.

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राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है यह सत्र

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आगामी मानसून सत्र केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शक्ति प्रदर्शन का मंच भी बनेगा. सरकार जहां अपनी नीतियों और उपलब्धियों का पक्ष रखेगी, वहीं विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने का प्रयास करेगा. ऐसे में चार दिनों का यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.