अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने दो दिवसीय बैठक के बाद साल 2023 के बाद पहली बार  ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है. अमेरिका में बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए केंद्रीय बैंक ने ये कदम उठाया है. इस बढ़ोतरी के बाद अब अमेरिका में ब्याज दरों का नया दायरा 3.75% से बढ़कर 4.00% की सीमा में पहुंच गया है. ये कदम अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

फेड के इस फैसले से भारत के शेयर बाजार, रुपये और विदेशी निवेश पर भी असर पड़ने की संभावना है. केंद्रीय बैंक अब तक अर्थव्यवस्था पर महंगे कच्चे तेल, नए टैरिफ नियमों के असर का आकलन कर रहा था.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था और दुनिया के वित्तीय बाजारों के लिए बुधवार देर रात को बड़ा फैसला आया है. अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दर 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाने का फैसला किया है. इस साल जनवरी से ही ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया गया था.

यह 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है। फेड के इस फैसले का असर भारत के बाजार, रुपये और विदेशी निवेश पर भी देखने को मिल सकता है. 2023 के बाद पहली बार ब्याज दर 25 बेसिस पॉइंट बढ़कर 3.75% से 4% हो गया है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लगातार बढ़ रही महंगाई है.

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में एनर्जी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. इन सभी वजहों ने महंगाई को कम नहीं होने दिया. इन सभी वजहों ने महंगाई को कम नहीं होने दिया. ब्याज दर बढ़ाने का यह यह फैसला महंगाई के लगातार ऊंचे स्तर के बीच लिया गया है.

अमेरिका में महंगाई पर कई कारणों का असर देखने को मिल रहा है. मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है. फेड की सितंबर बैठक 15-16 सितंबर को हुई और बाजार पहले से ही 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा था.

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