देहरादून. उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों का खतरा बढ़ गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वसुंधरा ताल टूटी तो 10 मिनट में तबाही मच सकती है. इसे देखते हुए हिमनद झीलों की निगरानी को मजबूत किया जाएगा. खतरे से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने का काम जल्द शुरू किया जाएगा.
सरकार GLOF मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करेगी. CBRI रुड़की के सहयोग से ये सिस्टम बनेगा. झीलों से संभावित खतरे पर सरकार की भी नजर है. चमोली की वसुंधरा ताल में पहला सिस्टम लगेगा. वसुंधरा ताल को अति संवेदनशील माना गया है. फिलहाल 20 से 30 सितंबर के बीच सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा गया है.
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बता दें कि प्रेदश में लगातार बारिश का दौर देखा जा रहा है. वहीं बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए खतरा बन रहा है. साथ ही कई क्षेत्रों में भू स्खलन की घटना भी देखी जा रही है. बारिश के चलते आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है. प्रदेश के ज्यादातर जिलों में रविवार को भी भारी बारिश के आसार हैं. मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, हरिद्वार, बागेश्वर, नैनीताल, पौड़ी और चमोली जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.
राज्य में शनिवार को 108 सड़कें बंद रहीं, जो अभी तक नहीं खुली हैं. इनमें सर्वाधिक प्रभावित ग्रामीण मार्ग (81) हैं. जिलों की बात करें तो अल्मोड़ा में 8, बागेश्वर में 6, चमोली में 13, चंपावत में दो, देहरादून में 12 सड़कें बंद हैं. इनके अलावा नैनीताल में 19, पौड़ी में 12, पिथौरागढ़ में 18, रुद्रप्रयाग में आठ, टिहरी में 8 और उत्तरकाशी में दो मार्ग बंद रहे.



