वाराणसी में कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, भाकपा (माले), राजद और फॉरवर्ड ब्लॉक समेत विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रदर्शन किया. नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिकों की निजता को लेकर सरकार पर सवाल उठाए.

वाराणसी. राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं-नेताओं की कथित व्यक्तिगत निगरानी तथा लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के विरोध में कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रदर्शन किया. कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, भाकपा (माले), राष्ट्रीय जनता दल और फॉरवर्ड ब्लॉक के कार्यकर्ता शुक्रवार को वाराणसी कचहरी परिसर में जुटे और केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ पैदल मार्च निकाला.

आंबेडकर प्रतिमा से मार्च

विभिन्न दलों के कार्यकर्ता वाराणसी कचहरी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास एकत्र हुए. इसके बाद नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च के रूप में कचहरी पहुंचे और सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया.

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और विरोध की आवाज को दबाया जा रहा है. नेताओं ने कहा कि असहमति को लोकतंत्र में अपराध नहीं माना जा सकता और सरकार को विपक्ष की आवाज दबाने के बजाय जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए.

निजी जानकारी पर सवाल

वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है. नागरिकों को अपनी बात रखने, सरकार की नीतियों का विरोध करने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने का संवैधानिक अधिकार भी है.

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कार्यकर्ताओं के बैंक खातों, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वंश-वृक्ष, व्यवसाय और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों से संबंधित सूचना जुटाने के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायतों पर चिंता जताई.

नेताओं का कहना था कि किसी नागरिक की निजी जानकारी हासिल करने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार, निर्धारित प्रक्रिया और जवाबदेही जरूरी है. उन्होंने कहा कि मौखिक आदेश या अस्पष्ट निर्देशों के आधार पर व्यक्तिगत जानकारी जुटाना नागरिकों के निजता के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जोर

विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा. नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है.

कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि विपक्ष को दुश्मन मानकर उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाना लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को समझना चाहिए कि सरकार स्थायी नहीं होती, जबकि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाएं स्थायी होती हैं.