सुशील सलाम, कांकेर। जिले के कोयलीबेड़ा क्षेत्र में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 8 दिनों से चल रहा आंदोलन अब उग्र होता नजर आ रहा है। 18 पंचायतों के 68 गांवों के ग्रामीणों ने बुधवार को अंतागढ़ में अनिश्चितकालीन चक्काजाम शुरू कर दिया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने अंतागढ़ के दोनों ओर सड़क जाम कर यातायात पूरी तरह बाधित कर दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले आठ दिनों से कोयलीबेड़ा में धरना दे रहे हैं, लेकिन अब तक शासन-प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। आंदोलन में शामिल लोगों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सांसद और विधायक के प्रति भी नाराजगी देखने को मिली।
इन मांगों को लेकर ग्रामीण कर रहे आंदोलन
प्रदर्शनकारी जिला सहकारी बैंक की स्थापना, ब्लॉक मुख्यालय को पखांजूर से वापस कोयलीबेड़ा लाने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर की नियुक्ति, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना, डीएमएफ राशि का प्रभावित क्षेत्रों में शत-प्रतिशत उपयोग, जर्जर स्कूल और आश्रमों की मरम्मत, कॉलेज की स्थापना, पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध कराने, अंतागढ़-कोयलीबेड़ा सड़क के डामरीकरण तथा कोयलीबेड़ा तहसील को अनुभाग अंतागढ़ से जोड़ने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
संवाद से निकलता है समाधान – मुख्यमंत्री
इधर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर कहा है कि संवाद से समाधान निकलता है। किसी की अगर कोई समस्या है तो उसे सरकार के समक्ष लाए। सरकार निश्चित रूप से उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

समझाइश में जुटा प्रशासन
अंतागढ़ में चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मौके पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं तथा प्रदर्शनकारियों से लगातार चर्चा की जा रही है।
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