पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्यभर के मदरसों का व्यापक सर्वे कराने का फैसला लिया है। शुक्रवार को जारी आदेश में सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने जिलों में संचालित मदरसों की विस्तृत जानकारी जुटाएं और किसी भी संभावित अनियमितता या गैर-कानूनी गतिविधि की पहचान करें।

सरकार के निर्देश के अनुसार, सर्वे में सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों के साथ-साथ निजी, गैर-सहायता प्राप्त और बिना मान्यता वाले मदरसों को भी शामिल किया जाएगा। यह सर्वे ब्लॉक और नगरपालिका स्तर पर किया जाएगा ताकि प्रत्येक जिले का सटीक और अद्यतन डेटा तैयार किया जा सके।

सर्वे का उद्देश्य क्या है?

सरकारी आदेश में कहा गया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मदरसों की स्थिति, शैक्षणिक गतिविधियों, बुनियादी सुविधाओं, छात्र संख्या और अन्य आवश्यक जानकारियों का प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार करना है। इससे शिक्षा संबंधी योजनाएं बनाने, बच्चों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से लागू करने और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सर्वे के दौरान सामने आने वाली किसी भी गड़बड़ी या अवैध गतिविधि की पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

छात्रों और संस्थानों को राहत

राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल इस सर्वे के आधार पर किसी भी मदरसे को बंद करने, छात्रों को हटाने या किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। सभी संस्थान मौजूदा शैक्षणिक सत्र के दौरान सामान्य रूप से अपनी गतिविधियां जारी रख सकेंगे। जिला प्रशासन को अपनी रिपोर्ट 5 जुलाई तक राज्य सरकार को सौंपनी होगी।

बंगाल में कितने मदरसे हैं?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लगभग 614 सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। वहीं 601 ऐसे मदरसे हैं जिन्हें सरकारी मान्यता तो प्राप्त है, लेकिन उन्हें वित्तीय सहायता नहीं मिलती। बिना मान्यता वाले मदरसों की संख्या को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

‘वंदे मातरम’ विवाद के बीच आया फैसला

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में राज्य सरकार द्वारा मदरसों में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए 3 जून को कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई, जिसमें इस निर्देश को रद्द करने की मांग की गई है। अब मदरसों के सर्वे को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में नई बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

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