Technology Desk : मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन तेज बारिश के दौरान कई लोगों को इंटरनेट की धीमी स्पीड और बार-बार कनेक्शन टूटने की समस्या का सामना करना पड़ता है। बारिश शुरू होते ही कभी Wi-Fi की स्पीड कम हो जाती है तो कभी मोबाइल इंटरनेट पहले की तुलना में धीमा महसूस होने लगता है। कई बार वीडियो बफर होने लगते हैं और वेबसाइट या ऐप खुलने में भी ज्यादा समय लग जाता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बारिश और इंटरनेट के बीच क्या संबंध है? क्या बारिश की बूंदें वास्तव में इंटरनेट सिग्नल को प्रभावित करती हैं? टेक्नोलॉजी में इस तरह की समस्या को कई मामलों में Rain Fade यानी रेन फेड कहा जाता है। हालांकि, इसका असर हर तरह के इंटरनेट कनेक्शन पर एक जैसा नहीं होता।
बारिश में इंटरनेट स्लो होने की क्या वजह है?
इंटरनेट कनेक्शन के अलग-अलग प्रकार अलग तकनीक पर काम करते हैं। Wi-Fi, मोबाइल नेटवर्क और सैटेलाइट इंटरनेट में रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल होता है। जब तेज बारिश होती है, तो हवा में मौजूद पानी की बूंदें रेडियो सिग्नल के रास्ते में आ सकती हैं।
बारिश की बूंदों के कारण सिग्नल में कुछ हद तक अवशोषण और बिखराव हो सकता है। इससे सिग्नल कमजोर पड़ सकता है और कनेक्शन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसका असर खासतौर पर उन वायरलेस कनेक्शनों पर ज्यादा दिखाई दे सकता है, जिनमें सिग्नल को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सामान्य बारिश की हर बूंद इंटरनेट को बंद नहीं कर देती। हल्की बारिश में आमतौर पर इंटरनेट पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता। समस्या ज्यादा तेज बारिश, खराब मौसम और कमजोर नेटवर्क परिस्थितियों में बढ़ सकती है।
5G और हाई-फ्रीक्वेंसी नेटवर्क पर क्यों पड़ सकता है ज्यादा असर?
5G नेटवर्क की कुछ तकनीकें अपेक्षाकृत ज्यादा फ्रीक्वेंसी वाले बैंड का इस्तेमाल करती हैं। ज्यादा फ्रीक्वेंसी वाले वायरलेस सिग्नल कुछ परिस्थितियों में बारिश और वातावरण में मौजूद नमी से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर 5G कनेक्शन बारिश में धीमा हो जाएगा। नेटवर्क का इस्तेमाल किस फ्रीक्वेंसी बैंड पर हो रहा है, टावर कितनी दूरी पर है, सिग्नल की ताकत कितनी है और उस समय नेटवर्क पर कितना लोड है, इन सभी चीजों का असर पड़ता है।
इसी वजह से एक ही जगह पर बारिश के दौरान किसी व्यक्ति को मोबाइल इंटरनेट की अच्छी स्पीड मिल सकती है, जबकि दूसरे फोन में स्पीड कम हो सकती है।
सिर्फ बारिश की बूंदें ही जिम्मेदार नहीं होतीं
बारिश के दौरान इंटरनेट स्लो होने की वजह सिर्फ रेडियो सिग्नल का कमजोर होना नहीं है। तेज बारिश के साथ आने वाली हवा, आंधी और बिजली जैसी मौसम की स्थिति भी नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के नेटवर्क में कई तरह के बाहरी उपकरण, केबल और कनेक्शन होते हैं। अगर तेज बारिश या तूफान की वजह से इनमें खराबी आती है, तो पूरे इलाके में इंटरनेट की स्पीड कम हो सकती है या कनेक्शन कुछ समय के लिए बंद भी हो सकता है।
कुछ मामलों में केबल या कनेक्शन से जुड़े उपकरणों में पानी या नमी पहुंचने से भी समस्या पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में घर का Wi-Fi राउटर बिल्कुल सही होने के बावजूद इंटरनेट धीमा रह सकता है।
बारिश में कौन सा इंटरनेट कनेक्शन ज्यादा भरोसेमंद है?
फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट
फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट को आमतौर पर बारिश के मौसम में वायरलेस कनेक्शन की तुलना में ज्यादा स्थिर माना जाता है। इसमें डेटा इलेक्ट्रिकल रेडियो सिग्नल की जगह फाइबर केबल के अंदर लाइट सिग्नल के रूप में भेजा जाता है।
इस वजह से घर के अंदर बारिश की बूंदों का फाइबर केबल में चल रहे सिग्नल पर सीधा असर नहीं पड़ता। हालांकि, अगर बाहर लगे फाइबर उपकरण, कनेक्शन या केबल में खराबी आ जाए, तो इंटरनेट सेवा प्रभावित हो सकती है।
4G और 5G मोबाइल डेटा
मोबाइल इंटरनेट की स्पीड मौसम के साथ-साथ नेटवर्क कवरेज और टावर पर मौजूद यूजर्स की संख्या पर भी निर्भर करती है। तेज बारिश के दौरान अगर सिग्नल की गुणवत्ता कम होती है या नेटवर्क पर ज्यादा लोड होता है, तो स्पीड घट सकती है।
5G के कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी बैंड बारिश के कारण अधिक प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन हर 5G नेटवर्क पर इसका असर समान नहीं होता।
सैटेलाइट इंटरनेट
सैटेलाइट इंटरनेट में सिग्नल को जमीन से सैटेलाइट तक और फिर वापस जमीन तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। तेज बारिश और घने बादलों की स्थिति में इस सिग्नल में व्यवधान आ सकता है।
इसी वजह से खराब मौसम के दौरान सैटेलाइट इंटरनेट में कनेक्शन या स्पीड से जुड़ी समस्या देखने को मिल सकती है। इसका असर खासतौर पर बहुत तेज बारिश के दौरान ज्यादा हो सकता है।
Wi-Fi स्लो हो तो सबसे पहले क्या करें?
अगर बारिश के दौरान आपके घर का Wi-Fi धीमा हो गया है, तो तुरंत यह मान लेना सही नहीं है कि राउटर खराब हो गया है। कुछ आसान तरीकों से आप समस्या की जांच कर सकते हैं।
- राउटर और मॉडेम को रीस्टार्ट करें
सबसे पहले राउटर और मॉडेम को बंद कर दें। कुछ सेकेंड इंतजार करने के बाद इन्हें दोबारा चालू करें। कई बार अस्थायी नेटवर्क या कनेक्शन की समस्या रीस्टार्ट करने के बाद ठीक हो जाती है।
- 2.4GHz और 5GHz बैंड की जांच करें
अगर आपका राउटर डुअल-बैंड है, तो उसमें 2.4GHz और 5GHz दोनों नेटवर्क उपलब्ध हो सकते हैं। 5GHz बैंड आमतौर पर कम दूरी में ज्यादा स्पीड दे सकता है, लेकिन इसकी रेंज 2.4GHz की तुलना में कम होती है। इसलिए राउटर के पास होने पर 5GHz नेटवर्क का इस्तेमाल बेहतर स्पीड दे सकता है। वहीं, अगर डिवाइस राउटर से काफी दूर है या बीच में कई दीवारें हैं, तो 2.4GHz बैंड ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
- राउटर को सही जगह रखें
राउटर को घर के किसी बंद कोने, फर्श या मोटी दीवार के पीछे रखने से Wi-Fi सिग्नल कमजोर हो सकता है। राउटर को अपेक्षाकृत खुली और ऊंची जगह पर रखने की कोशिश करें। इसे धातु की बड़ी वस्तुओं और मोटी दीवारों से दूर रखने पर भी सिग्नल कवरेज बेहतर हो सकता है।
- गैर-जरूरी डिवाइस डिस्कनेक्ट करें
अगर एक ही Wi-Fi नेटवर्क से कई मोबाइल, टीवी, लैपटॉप और दूसरे स्मार्ट डिवाइस जुड़े हैं, तो नेटवर्क पर लोड बढ़ सकता है। जो डिवाइस उस समय इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं, उन्हें Wi-Fi से डिस्कनेक्ट कर दें। इससे उपलब्ध बैंडविड्थ सक्रिय डिवाइस के लिए ज्यादा रह सकती है।
- Wi-Fi एक्सटेंडर का इस्तेमाल करें
अगर घर के किसी हिस्से में Wi-Fi सिग्नल लगातार कमजोर रहता है, तो Wi-Fi एक्सटेंडर या मेश नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह खासतौर पर बड़े घरों या ऐसे स्थानों पर उपयोगी हो सकता है जहां राउटर और इस्तेमाल किए जा रहे डिवाइस के बीच काफी दूरी हो।
कैसे पता करें कि समस्या राउटर में है या इंटरनेट कनेक्शन में?
बारिश के दौरान इंटरनेट स्लो होने पर सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि समस्या घर के Wi-Fi में है या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के नेटवर्क में। अगर सिर्फ एक मोबाइल या लैपटॉप में इंटरनेट धीमा चल रहा है, जबकि दूसरे डिवाइस में स्पीड ठीक है, तो समस्या उस डिवाइस की सेटिंग, Wi-Fi कनेक्शन या नेटवर्क कार्ड से जुड़ी हो सकती है।
लेकिन अगर घर में जुड़े लगभग सभी मोबाइल, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी पर इंटरनेट धीमा चल रहा है, तो समस्या राउटर, मॉडेम या बाहर से आने वाले इंटरनेट कनेक्शन में हो सकती है। ऐसी स्थिति में राउटर रीस्टार्ट करने के बाद भी अगर कई घंटे तक समस्या बनी रहती है, तो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से शिकायत करना बेहतर है।
फाइबर इंटरनेट लगा है तो क्या बारिश से डरने की जरूरत है?
फाइबर इंटरनेट में बारिश का सीधा असर आमतौर पर कम होता है, क्योंकि डेटा फाइबर केबल के अंदर लाइट सिग्नल के जरिए चलता है। इसलिए सिर्फ बारिश होने से फाइबर इंटरनेट की स्पीड कम होना जरूरी नहीं है।
लेकिन फाइबर नेटवर्क के बाहर लगे उपकरण या कनेक्शन खराब होने पर समस्या आ सकती है। तेज बारिश, आंधी या पानी से किसी बाहरी उपकरण में खराबी आने पर पूरे इलाके की इंटरनेट सेवा प्रभावित हो सकती है।
इसलिए फाइबर कनेक्शन होने के बावजूद अगर तेज बारिश के दौरान इंटरनेट बंद हो जाता है, तो समस्या घर के राउटर के बजाय बाहरी नेटवर्क में भी हो सकती है।
क्या हर बारिश में इंटरनेट स्लो होता है?
ऐसा बिल्कुल नहीं है। हर बारिश के साथ इंटरनेट की स्पीड कम हो, यह जरूरी नहीं है। हल्की बारिश में ज्यादातर इंटरनेट कनेक्शनों पर कोई बड़ी समस्या नहीं आती। इंटरनेट पर असर कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे बारिश की तीव्रता, नेटवर्क की फ्रीक्वेंसी, टावर या सैटेलाइट की स्थिति, नेटवर्क कवरेज, सर्विस प्रोवाइडर का इंफ्रास्ट्रक्चर और उस समय नेटवर्क पर मौजूद ट्रैफिक।
इसलिए बारिश में इंटरनेट स्लो होने पर सिर्फ Wi-Fi राउटर को जिम्मेदार मानना सही नहीं है। कई बार समस्या इंटरनेट कंपनी के बाहरी नेटवर्क या मौसम की वजह से भी हो सकती है।


