“Life is 10% what you make it and 90% how you take it.” — जीवन का एक गहरा और प्रेरणादायक सत्य उजागर करने वाली पंक्ति है यह। मगर आम तौर पर सोंचा यही जाता है कि हमारी परिस्थितियाँ ही हमारे जीवन की दिशा तय करती हैं लेकिन सच्चाई इससे कहीं अलग है। क्योंकि जीवन में जो भी होता है वह केवल 10% है, जबकि हम उस स्थिति को किस नज़रिए से देखते हैं और उसका सामना जिस तरह से करते हैं वही हमारे जीवन का 90% हिस्सा तय करता है।
चुनौतियों को समस्या मानकर उससे घबराने वाले अलग परिणाम पाते हैं जबकि उसे अवसर समझकर आगे बढ़ने वालों का जीवन अलग बन जाता है। सोचने का अन्दाज़ ही मिलने वाले परिणामों का जनक होता है। सकारात्मक दृष्टिकोण मुश्किलों के बीच भी संभावनाओं के दर्शन कराता है मगर नकारात्मक मानसिकता बस हर कदम पर रोड़े अटकाने का काम करती है।
श्रीमद्भगवद्गीता का श्लोक “उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।” जिसमें उद्धरेदात्मनाऽत्मानम् का अर्थ है मनुष्य को अपने आप को स्वयं के विवेक और अच्छे विचारों के माध्यम से ऊपर उठाना चाहिए और नात्मानमवसादयेत् का अर्थ है कभी भी अपने आप को हीन भावना से नष्ट नहीं करना चाहिए। समग्रता में कहें तो मनुष्य स्वयं ही अपना उत्थान और पतन करता है और वही अपने जीवन का सूत्रधार होता है।
जीवन में आने वाले एक ही तरह के उतार-चढ़ाव से कुछ व्यक्ति हार मान लेते हैं जबकि कुछ लोग उसी परिस्थिति को अपनी ताकत बना लेते हैं। जो अपने विचारों पर अंकुश रखने में सक्षम है वही हर परिस्थिति में खुद को संभाल सकता है और सफलता की ओर बढ़ता है। जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए अपने नजरिए को बदलना, पहली आवश्यकता है। परिस्थितियाँ कभी नियंत्रण में नहीं होतीं लेकिन प्रतिक्रिया जरूर नियंत्रण रखी जा सकती हैं। याद रखें, जिंदगी वैसी नहीं होती जैसी दिखती है बल्कि वैसी होती है जैसा हम उसे देखते हैं।
संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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