उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि समाज को सही राह और दिशा दिखाने के साथ ही साथ लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए रचनात्मक पत्रकारिता बहुत ही ज्यादा जरूरी है. मीडिया में पाज़िटिव कामों की बहुत अच्छी तरीके से रिपोर्टिंग की जानी चाहिए. युवाओं को तभी सही जानकारी और दिशा मिलेगी वरना वे पाज़िटिव इंटेरेस्ट खो कर ‘कॉकरोच’ की राह पर चल पड़ेंगे.
उपराष्ट्रपति का इशारा ‘कॉकरोच’ का मतलब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से था, जो एक व्यंग्य प्लेटफॉर्म है। उन्होंने उसका नाम लिए बिना ही कहा कि अगर मीडिया में सकारात्मक खबरों को पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी, तो युवा ‘कॉकरोच’ का अनुसरण कर सकते हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मलयालम दैनिक ‘दीपिका’ की 140वीं वर्षगांठ के समारोह में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए. इसी अवसर पर उन्होंने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, ऐसे में तो मीडिया की भूमिका और भी बढ़ जाती है. 2047 तक हम सबसे विकसित देश बनना चाहते हैं. ऐसे लक्ष्य प्राप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग का सकारात्मक योगदान बहुत जरूरी है और यह तब हो पाएगा जब मीडिया सकारात्मक विकास पर अच्छी तरह से रिपोर्टिंग करें. समाज के हर वर्ग के योगदान के बिना यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता.
अगर मीडिया और समाज युवाओं को अच्छी उपलब्धियों और सकारात्मक कामों को नहीं दिखाएगा तो युवा दिशाहीन होकर ‘कॉकरोच’ को फॉलो करने लगेंगे. उन्होंने खासतौर पर युवाओं के बीच सोशल मीडिया सेंसेशन का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या वास्तव में कोई चीज एक ही दिन में इतना ध्यान आकर्षित करने लायक है. यह ज्यादा समय तक नहीं चल सकता.
उपराष्ट्रपति ने नेक विचार और सकारात्मक संदेश समाज के हर कोने तक पहुंचे, इस बात पर बहुत ही ज्यादा जोड़ दिया है. जाहिर तौर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर बिना उसका नाम लिए खाततौर से युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर इतनी जल्दी ऐक्टिवनेस को लेकर बात कहीं.
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