दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में आने वाले दिनों में पर्यटकों और खासकर बच्चों को फिर से जेब्रा और जिराफ देखने का मौका मिल सकता है। करीब 15 साल बाद जेब्रा और 11 साल बाद जिराफ की वापसी की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही चिड़ियाघर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करते हुए दुर्लभ वन्यजीवों का नया संसार बसाने की योजना पर काम किया जा रहा है। नई योजना के तहत चिड़ियाघर में कई नई इमारतों और आधुनिक बाड़ों का निर्माण किया जाएगा, ताकि विभिन्न प्रजातियों के जानवरों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में यहां करीब 109 प्रजातियों के वन्यजीव देखने को मिलेंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना में जेब्रा और जिराफ के अलावा चीता, न्यू वर्ल्ड मंकी और माउस डियर जैसे दुर्लभ जीवों को भी शामिल किया गया है। इन प्रजातियों के आने से चिड़ियाघर की जैव विविधता बढ़ेगी और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
करीब 15 साल बाद जेब्रा और 11 साल बाद जिराफ को फिर से चिड़ियाघर में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके साथ ही चिड़ियाघर के आधुनिकीकरण और नई प्रजातियों को शामिल करने की महत्वाकांक्षी योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। दिल्ली चिड़ियाघर में आखिरी जेब्रा की मौत 30 अप्रैल 2011 को हुई थी। वहीं, ‘अंकित’ नाम के आखिरी जिराफ की जून 2015 में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। इसके बाद से चिड़ियाघर में इन दोनों लोकप्रिय प्रजातियों की अनुपस्थिति महसूस की जा रही थी।
करीब 30 वर्ष पहले दिल्ली चिड़ियाघर में 130 से अधिक प्रजातियों के वन्यजीव मौजूद थे, लेकिन वर्तमान में यहां लगभग 93 प्रजातियों के 1,245 जानवर ही रह गए हैं। अब चिड़ियाघर प्रशासन का लक्ष्य वन्यजीवों की संख्या और विविधता दोनों को बढ़ाना है। नई योजना के तहत यहां करीब 109 प्रजातियों के वन्यजीवों को शामिल किया जाएगा। इनमें जेब्रा, जिराफ और चीता के अलावा न्यू वर्ल्ड मंकी तथा माउस डियर जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं। वन्यजीवों को देश और विदेश के विभिन्न चिड़ियाघरों से लाने के लिए 3.78 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन प्रजातियों के लिए आधुनिक बाड़े, बेहतर आवास और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
दिल्ली चिड़ियाघर के कायाकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम पिछले वर्ष उठाया गया था, जब रिलायंस कंपनी के ग्रीन जूलॉजिकल रिसर्च एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC), राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) और गुजरात सरकार के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते के बाद चिड़ियाघर के व्यापक आधुनिकीकरण की योजना को गति मिली।इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 400 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है।
दिल्ली चिड़ियाघर में पिछले करीब 15 वर्षों से कोई जेब्रा नहीं है। आखिरी जेब्रा की मौत 30 अप्रैल 2011 को हुई थी। वहीं, करीब 11 साल पहले जून 2015 में ‘अंकित’ नामक आखिरी जिराफ की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। इसके बाद से चिड़ियाघर में इन दोनों प्रजातियों की अनुपस्थिति बनी हुई है। अब चिड़ियाघर प्रशासन वन्यजीवों की प्रजातियों की संख्या 93 से बढ़ाकर 109 करने की तैयारी कर रहा है। नई योजना के तहत जेब्रा और जिराफ के अलावा चीता, न्यू वर्ल्ड मंकी, माउस डियर समेत कई दुर्लभ प्रजातियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे चिड़ियाघर की जैव विविधता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पर्यटकों को अधिक वन्यजीव देखने का अवसर मिलेगा। वन्यजीवों को देश-विदेश के विभिन्न चिड़ियाघरों से लाने के लिए 3.78 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इनके लिए आधुनिक बाड़े और बेहतर आवास विकसित किए जाएंगे ताकि जानवरों को प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुविधाएं मिल सकें।
लैमिनेटेड ग्लास वाले बाड़े होंगे खास आकर्षण
योजना के तहत मथुरा रोड से लेकर चिड़ियाघर के मुख्य प्रवेश द्वार तक लगभग 6 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। आगंतुकों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए बस, कार, थ्री-व्हीलर और पैदल यात्रियों के लिए अलग-अलग चार मार्ग तैयार किए जाएंगे। इससे प्रवेश और निकास के दौरान होने वाली भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिलेगी। परियोजना की सबसे खास विशेषताओं में से एक कुछ पशु बाड़ों में लैमिनेटेड ग्लास की दीवारों का उपयोग होगा। इसके साथ ही दिल्ली चिड़ियाघर देश का पहला ऐसा चिड़ियाघर बन जाएगा, जहां इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इन विशेष ग्लास दीवारों के जरिए आगंतुक बिना किसी बाधा के जानवरों को करीब से देख सकेंगे, जबकि पशुओं की सुरक्षा और आराम भी सुनिश्चित रहेगा।
प्रारंभिक चरण में मोटे लैमिनेटेड ग्लास का उपयोग बाघ और बंदरों के बाड़ों में किया जाएगा। इससे आगंतुकों को अधिक स्पष्ट और सुरक्षित दृश्य अनुभव मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर के चिड़ियाघरों की तर्ज पर विकसित की जा रही है और भविष्य में अन्य बाड़ों में भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है। दिल्ली चिड़ियाघर के आधुनिकीकरण के साथ यहां जेब्रा, जिराफ, चीता, न्यू वर्ल्ड मंकी और माउस डियर जैसी नई प्रजातियों को भी शामिल करने की योजना है। इससे चिड़ियाघर वन्यजीव संरक्षण, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सकेगा।
विजिटर्स के लिए प्रमुख सुविधाएं
मथुरा रोड से एंट्री गेट तक 6 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं का विकास।
बस, कार, थ्री-व्हीलर और पैदल यात्रियों के लिए अलग-अलग चार मार्ग।
कुछ पशु बाड़ों में लैमिनेटेड ग्लास की दीवारें लगाई जाएंगी।
दिल्ली चिड़ियाघर लैमिनेटेड ग्लास का उपयोग करने वाला देश का पहला चिड़ियाघर बनेगा।
पहले चरण में बाघ और बंदरों के बाड़ों में मोटे लैमिनेटेड ग्लास लगाए जाएंगे।
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