न्यामुद्दीन अली, अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से एक मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। बिजुरी थाना क्षेत्र के मुख्य बाजार में मासूम बच्चे खुलेआम सुलेशन यानि जूता चिपकाने और पंचर बनाने वाले सॉल्यूशन का जानलेवा नशा करते दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। सड़कों पर नाटकों और नुक्कड़ कार्यक्रमों के जरिए नशे से दूरी है जरूरी का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस और प्रशासन की जमीनी हकीकत इस वायरल वीडियो ने उजागर कर दी है।
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जानलेवा केमिकल और मासूम बचपन
बिजुरी के मार्केट एरिया में मासूम बच्चे दिनदहाड़े पन्नियों और कपड़ों में सुलेशन डालकर उसके जहरीला धुंए का कस लगाते नजर आ रहे हैं। यह सॉल्यूशन बेहद खतरनाक और दिमागी तंत्र तंत्रिका को सुन्न करने वाला केमिकल होता है जो बच्चों के अंगों को धीरे-धीरे खत्म कर रहा है। सब्सटेंस एब्यूज का यह काला कारोबार बिजुरी शहर के बीचों-बीच फल-फूल रहा है लेकिन इसके पीछे के असली सौदागरों पर अब तक शिकंजा नहीं कसा जा सका है।
नंगे बदन घूम रहा नशेड़ी, कभी भी हो सकती है बड़ी वारदात
नशे का यह जाल केवल मासूम बच्चों तक सीमित नहीं है। बाजार क्षेत्र में एक व्यक्ति सुलेशन के अत्यधिक नशे में इस कदर धुत रहता है कि वह सरेराह अपने कपड़े तक उतारने लगता है। दिनभर मुख्य बाजार में अर्द्धनग्न हालत में घूमने वाले इस युवक से स्थानीय व्यापारी और राहगीर दहशत में हैं। कभी भी यह व्यक्ति किसी बड़ी अनहोनी या हिंसक वारदात को अंजाम दे सकता है। इसके बावजूद जिम्मेदार महकमा आंखें मूंदे बैठा है।
क्या है सुलेशन/सॉल्यूशन
सुलेशन एक प्रकार का कैमिकल है इसका इस्तेमाल साइकिल का पंक्चर जोड़ने, रबर चिपकाने में किया जाता है। लेकिन अब इसे एक प्रकार के इनहेलेंट नशे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सॉल्यूशन को किसी कपड़े या रुमाल पर निकालकर सीधे नाक से सूंघा जाता है। इसमें मौजूद टॉलीन और अन्य केमिकल वाष्प तंत्रिका तंत्र पर असर डालते हैं। यह बहुत सस्ता और आसानी से मिलने वाला नशा है।
यह कैसे काम करता है?
इसमें मौजूद रसायन हवा में जल्दी उड़ते हैं। जिसे रुमाल या पॉलीथिन में रखकर लगातार सूंघा जाता है। जिससे यह कुछ ही सेंकड में दिमाग तक पहुंचता है और सुस्ती या हल्कापन महसूस कराता है।
शरीर पर इसके गंभीर नुकसान
सुलेशन का नशा करने से यह मावन शरीर की दिमाग कोशिकाओं को स्थायी रूप से नष्ट कर सकता है। इससे फेफड़े, लिवर और किडनी प्रभावित हो सकते हैं। सोचने समझने की शक्ति खत्म होने लगती है। वहीं पहली बार में ज्यादा मात्रा में लेने से दिल की धड़कन रुक सकती है और मौत हो सकती है।
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उठते गंभीर सवाल
इस वीडियो के सामने आने से कुछ ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं जो प्रशासन के सुस्त रवैये को उजागर करता है। आखिर मासूमों तक कौन पहुंचा रहा है यह ‘धीमा जहर’? किराना, हार्डवेयर या पंचर दुकानों से यह सॉल्यूशन मासूमों के हाथों में आसानी से कैसे बिक रहा है? कहां गया जागरूकता अभियान? क्यों मौन है जिम्मेदार महकमा? क्या प्रशासन किसी बड़ी आपराधिक घटना या मासूम की मौत के बाद ही जागेगा?
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