राकेश कथूरिया, कैथल. न्यायिक परिसर कैथल में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें कुल 26 हजार 842 लंबित मामले सुनवाई के लिए रखे गए, जिनमें से 13 हजार 260 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।

लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न आपराधिक, एनआई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम विवाद, राजस्व सहित अन्य मामलों में कुल 9 करोड़ 30 लाख 97 हजार 907 रुपये की राशि से संबंधित मामलों का निपटान किया गया। य़ह जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने दी।

उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशनुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कैथल की अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंचन माही की देखरेख में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा कर आमजन को त्वरित एवं सस्ता न्याय उपलब्ध करवाना रहा।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक अधिकारियों की अध्यक्षता में विभिन्न बेंचों का गठन किया गया था। इनमें प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय अजय वर्मा; अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुपमेश मोदी; सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) डॉ. अमन इंद्र सिंह; सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) जैस्मिन कौर; सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) कैथल गगन ठाकुर; सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) कैथल माधव मित्तल तथा अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) गुहला डिवीजन अक्षय कुमार शामिल रहे।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने कहा कि लोक अदालत में मामलों का निपटारा पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से किया जाता है। इसमें किसी एक पक्ष की जीत या हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों के बीच पुनः स्नेह, सौहार्द्र एवं बंधुत्व की भावना स्थापित होती है।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत त्वरित एवं सस्ते न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसे जनता की अदालत भी कहा जाता है। लोक अदालत में मामलों के निपटारे के लिए किसी न्यायालय शुल्क की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी पक्षकार द्वारा न्यायालय शुल्क पहले ही जमा कराया गया है, तो लोक अदालत में विवाद का निपटारा होने पर वह शुल्क वापस कर दिया जाता है।