चंडीगढ़। हरियाणा में बढ़ते शहरी ट्रैफिक और शहरों के भीतर वाहनों के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों और कस्बों के बाहर रिंग रोड तथा नेशनल हाईवे विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है। इस पूरी कवायद के तहत कई अहम सड़क परियोजनाओं पर करीब 9700 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में इन परियोजनाओं की प्रगति और वित्तीय हिस्सेदारी से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के कारण शहरी इलाकों में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान को आगे बढ़ाना था। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप राज्य की वित्तीय हिस्सेदारी से संबंधित मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए।
सरकार की योजना है कि बड़े शहरों और कस्बों के बाहर ऐसी सड़क कनेक्टिविटी तैयार की जाए, जिससे भारी और लंबी दूरी के वाहनों को शहरों के बीच से गुजरने की जरूरत न पड़े। इससे एक तरफ शहरों के अंदर जाम की समस्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर लोगों के आवागमन को भी बेहतर बनाया जा सकेगा। केंद्र सरकार के लागत शेयर से जुड़े मामलों के लिए वित्त विभाग, लोक निर्माण विभाग और शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित की गई है।
पांच बड़े बाईपास को मंजूरी
बैठक में मुख्यमंत्री ने हिसार, कुरुक्षेत्र, नारनौल, जींद और सोहना-पलवल से जुड़ी महत्वपूर्ण बाईपास परियोजनाओं को मंजूरी दी। हिसार बाईपास को हिसार-राजगढ़ रोड स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-52 से हिसार-दिल्ली रोड और हिसार-कैथल रोड तक जोड़ने की योजना है। इससे शहर के भीतर गुजरने वाले यातायात को वैकल्पिक मार्ग मिलने की उम्मीद है।
कुरुक्षेत्र-लाडवा बाईपास की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। सरकार के अनुसार इस परियोजना पर जल्द काम शुरू किया जाएगा। वहीं नारनौल में करीब 11 किलोमीटर लंबा सिटी बाईपास बनाया जाएगा, जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग-148बी से जोड़ा जाएगा।
जींद में शहर के दूसरी ओर बाहरी रिंग रोड और बाईपास विकसित करने की योजना है। यहां राष्ट्रीय राजमार्ग-352 को चार लेन की सड़क के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग-919 से पलवल-सोहना बाईपास को भी नए सिरे से डिजाइन कर उसका निर्माण किया जाएगा। यह मार्ग करीब 24 किलोमीटर लंबा और चार लेन का होगा।
दिल्ली-एनसीआर कनेक्टिविटी पर भी फोकस
सरकार ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को लेकर भी कई परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ाने का फैसला किया है। डीएनडी-फरीदाबाद-बल्लभगढ़ बाईपास को केएमपी लिंक के जरिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना है।
इसके अलावा करनाल रिंग रोड के लिए राज्य की ओर से भूमि हिस्सेदारी जमा कराई जा चुकी है। अंबाला शहर और अंबाला कैंट को जोड़ने वाला रिंग रोड भी निर्माणाधीन है और इसे जल्द पूरा करने की बात कही गई है।
इन सड़कों को भी मिली मंजूरी
बैठक में रेवाड़ी-भटिंडा रेलवे लाइन पर सिरसा में सिविल स्टेशन रोड के पास रेलवे अंडरब्रिज बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा कनीना-महेंद्रगढ़ रोड से अनावास, ढाणी राजावास स्कूल से बलाना, खातोद से बुड़ीन, निम्भेड़ा और बलैचा के लिए लिंक रोड, महेंद्रगढ़-बुचौली रोड तथा नांगवास से अटेली सड़क के अतिरिक्त कार्यों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ शहरों में यातायात का दबाव घटाना सरकार की प्राथमिकता है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से बड़े शहरों के आसपास वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होंगे और लंबी दूरी के यातायात को शहरों से बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
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