भागलपुर। बिहार में यूजीसी रेगुलेशन को प्रभावी ढंग से लागू करने और सामाजिक न्याय की आवाज बुलंद करने के लिए छात्र संगठनों ने कमर कस ली है। सोमवार को भागलपुर के एक निजी होटल में विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 18 मार्च को पटना में होने वाले ‘समता महाजुटान मार्च’ की तैयारियों को अंतिम रूप देना और आंदोलन की रणनीति साझा करना था।
18 मार्च को पटना में शक्ति प्रदर्शन
बैठक में छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि सामाजिक आंदोलन और बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में 18 मार्च को पटना के 10 नंबर गेट के पास ‘समता महाजुटान’ आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार, सबसे पहले एक विशाल आमसभा होगी, जिसके बाद सभी प्रतिभागी अपनी मांगों के समर्थन में राजभवन तक पैदल मार्च निकालेंगे।
अधिकारों के हनन का आरोप
वक्ता अनुपम आशीष ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यूजीसी रेगुलेशन के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि शोधार्थियों और छात्रों के मौलिक अधिकारों का भी हनन हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने के लिए इन नियमों का पूर्णतः लागू होना अनिवार्य है।
आंदोलन को धार देने की तैयारी
वर्तमान में बिहार के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क अभियान चलाकर छात्रों को इस महाजुटान का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भागलपुर में भी जमीनी स्तर पर व्यापक तैयारियां चल रही हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यूजीसी रेगुलेशन को स्थायी रूप से लागू करने पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो इस आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और भी उग्र व व्यापक बनाया जाएगा।
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