कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने दहेज जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ अब राज्यव्यापी अभियान छेड़ने का फैसला लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण समुदायों को केंद्र में रखकर दहेज विरोधी व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण का भी सहयोग लिया जाएगा।

मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि दहेज के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ कानून लागू करने की व्यवस्था को भी और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य समाज में दहेज मांगने की मानसिकता के खिलाफ मजबूत जनमत तैयार करना और लोगों को यह संदेश देना है कि दहेज लेना और देना दोनों कानूनन अपराध हैं।

दहेज निषेध अधिनियम-1961 के प्रभावी क्रियान्वयन की हुई समीक्षा
अनुराग रस्तोगी मंगलवार को चंडीगढ़ में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में दहेज निषेध अधिनियम-1961 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। इस दौरान गृह विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सभी राज्यों को दहेज निषेध कानूनों के सख्त पालन, दहेज निषेध अधिकारियों की होगी नियुक्ति
बैठक में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने “स्टेट ऑफ यू.पी. बनाम अजमल बेग एवं अन्य” मामले में सभी राज्यों को दहेज निषेध कानूनों के सख्त पालन, दहेज निषेध अधिकारियों की नियुक्ति और जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। इन्हीं निर्देशों के पालन में हरियाणा सरकार ने यह कदम उठाया है।

मुख्य सचिव ने कहा कि दहेज उत्पीड़न और इससे जुड़े अपराधों को रोकने के लिए जन-केंद्रित और समन्वित रणनीति अपनाने की जरूरत है। उन्होंने निर्देश दिए कि दहेज निषेध अधिकारियों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जाएं ताकि शिकायतों का समय पर समाधान हो सके।

सरकार ने बताया कि अक्टूबर 2015 में जारी अधिसूचना के तहत प्रदेश के सभी सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को दहेज निषेध अधिकारी नामित किया जा चुका है। अब इन्हें शिकायतों के निपटारे, जागरूकता फैलाने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।

दहेज निषेध अधिकारियों के नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सार्वजानिक किए जाए
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि दहेज निषेध अधिकारियों के नाम, मोबाइल नंबर और आधिकारिक ईमेल आईडी जिला और उपमंडल स्तर पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि पीड़ित परिवार आसानी से संपर्क कर सकें। साथ ही पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी (दहेज मृत्यु) और धारा 498-ए (विवाहित महिलाओं के साथ क्रूरता) से जुड़े मामलों की शुरुआती स्तर से ही गंभीर जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।


दहेज निषेध अधिकारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने बताया कि दहेज निषेध अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (HIPA), गुरुग्राम को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रशिक्षण में कानूनी प्रावधान, पुलिस समन्वय, पीड़ित सहायता और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जैसे विषय शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी नेटवर्क और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर युवाओं, महिलाओं और अभिभावकों को दहेज प्रथा के कानूनी और सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा। विभाग द्वारा अब तक प्रदेशभर में करीब 17 हजार जागरूकता शिविर लगाए जा चुके हैं।


की जाएगी सख्त कार्रवाई

सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों, पंचायती राज संस्थाओं, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज से भी दहेज मुक्त हरियाणा बनाने में सहयोग की अपील की है। साथ ही नागरिकों से कहा गया है कि दहेज से जुड़ी किसी भी प्रताड़ना, धमकी या अवैध मांग की सूचना बिना डर के संबंधित अधिकारियों, पुलिस या महिला एवं बाल विकास विभाग को दें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दहेज मांगने या महिलाओं को प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।