अनुज कुमार पांडेय, गोपालगंज। रोजगार की तलाश में घर से दूर गए गोपालगंज जिले के एक प्रवासी मजदूर की कथित तौर पर ‘बिहारी’ कहकर की गई निर्मम पिटाई के बाद मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

​पुणे से कर्नाटक गया था मृतक मजदूर

​मृतक की पहचान गोपालगंज जिले के विशंभरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तिवारी मटिहनिया गांव निवासी पीर मोहम्मद के 35 वर्षीय पुत्र चांद मोहम्मद के रूप में की गई है। चांद मोहम्मद पेशे से एक कुशल वेल्डर था और अपनी आजीविका चलाने के लिए पिछले तीन वर्षों से पुणे में रहकर मजदूरी करता था। कुछ समय पहले ही वह एक ठेकेदार के माध्यम से काम के सिलसिले में कर्नाटक गया था, जहां उसे इस अमानवीय हिंसा का शिकार होना पड़ा।

​स्थानीय विवाद और बर्बरता की खौफनाक रात

​परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कर्नाटक में किसी मामूली बात को लेकर चांद मोहम्मद का वहां के कुछ स्थानीय लोगों के साथ विवाद हो गया था। आरोप है कि इसी विवाद के दौरान स्थानीय लोगों ने उसे निशाना बनाया और उसे केवल ‘बिहारी’ बताकर उसके साथ अत्यंत क्रूरता व बर्बरता से मारपीट की। यह पूरी घटना आठ सितंबर की रात की बताई जा रही है, जहां बेरहमी से किए गए हमलों के कारण चांद मोहम्मद गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही अचेत हो गया था।

​अस्पताल से छुट्टी के बाद रास्ते में हुआ निधन

​घटना के अगले दिन सुबह स्थानीय पुलिस ने अचेत अवस्था में पड़े चांद मोहम्मद को बरामद किया और तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। खबर मिलते ही घबराए परिजन तुरंत कर्नाटक के लिए रवाना हुए। अस्पताल में उसकी नाजुक और गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की सलाह पर परिजन उसे बेहतर इलाज के लिए एम्बुलेंस से बिहार वापस ला रहे थे। हालांकि, रास्ते में ही उसकी हालत बिगड़ गई और उसने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं। जैसे ही उसका शव उसके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में मातम पसर गया और परिजनों की चीख-पुकार से कोहराम मच गया।

​पांच मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

​चांद मोहम्मद के चाचा फिरोज आलम ने बेहद दुखी मन से बताया कि बिहार के अंदर रोजगार के पर्याप्त साधन और अवसर न मिलने के कारण उसे अपने परिवार का पेट पालने के लिए मजबूरन दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करनी पड़ती थी। मृतक अपने पीछे अपनी बेसहारा पत्नी, चार छोटी बेटियों और एक इकलौते बेटे को छोड़ गया है। घर के एकमात्र कमाने वाले शख्स की अचानक हुई इस मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और इन मासूम बच्चों के भविष्य के सामने गहरा आर्थिक संकट पैदा हो गया है।

​पुलिस जांच और न्याय की गुहार

​इस घटना के बाद परिजनों ने स्थानीय थाने में आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराते हुए प्राथमिकी कराई है। पीड़ित परिवार और आक्रोशित ग्रामीणों ने कर्नाटक पुलिस से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी जांच करने और सभी दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा देने की मांग की है। इसके साथ ही, परिवार की अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार से उचित मुआवजे की गुहार लगाई गई है ताकि अनाथ हुए बच्चों का भरण-पोषण और पढ़ाई-लिखाई सुचारू रूप से चल सके। फिलहाल, पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।