संसार में किसी भी काम को पूरा करने के लिए सहयोग और समन्वय की आवश्यकता होती है लेकिन जब एक ही काम में ढेर सारे लोग अपनी-अपनी चलाने लगते हैं तब परिणाम विपरीत आने लगते हैं. “Too many cooks spoil the broth” यह कहावत इस सच्चाई को उजागर करने वाली है कि जब किसी काम में बहुत सारे लोग अपनी-अपनी सलाह और निर्देश देने लगते हैं तो व्यवस्थित काम भी बिगड़ने लगता है. सफलता के लिए सिर्फ़ स्पष्ट नेतृत्व, समन्वय और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है क्योंकि किसी भी कार्य की सफलता भीड़ पर नहीं बल्कि कुशल निर्देशन और स्पष्ट रणनीति पर निर्भर करती है.
एक संस्कृत सूक्ति “बहूनां हि वितानां समवाये न सिद्ध्यति” का मूल भाव है एक समय में कई लक्ष्यों (या कई विधाओं) पर ध्यान केंद्रित करने से व्यक्ति भ्रमित हो जाता है और कोई भी काम ढंग से नहीं हो पाता.
ऐसे ही एक काम के आवश्यकता से अधिक संचालक विचारों में मतभेद और असमंजस की स्थिति पैदा करने का काम करते हैं. एक कुशल नेतृत्व के आभाव में जब सभी अपनी समझ से निर्देश देने लगते हैं तब व्यवस्थित कार्य में भी अव्यवस्था फैल जाती है. महाभारत युद्ध में कौरवों के पास विशाल सेना थी जिसमें सभी महारथियों के अलग-अलग मत थे और अंततः उनका विनाश हुआ. जबकि दूसरी ओर भगवान श्रीराम की विशाल सेना के मार्गदर्शक भी वे स्वयं थे और पूरी सेना ने एक अनुशासित टीम के रूप में अपना काम किया. सफलता के लिए ‘सबकी राय’ से ज्यादा महवपूर्ण होती है ‘सही राय’ और स्पष्ट नेतृत्व.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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