दिल्ली की सड़कों को सुरक्षित और साफ-सुथरा बनाने के लिए सरकार अब तकनीक का सहारा ले रही है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक नई योजना तैयार की है, जिसके तहत सड़कों की निगरानी और मरम्मत के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस पहल के तहत विभाग एक ऐसा स्मार्ट सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है, जो सड़कों पर बने गड्ढों, मलबे और कचरे की पहचान कर सकेगा। यह तकनीक रियल-टाइम डेटा के जरिए संबंधित अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजेगी, जिससे समय पर मरम्मत और सफाई का काम किया जा सकेगा।
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने गड्ढों, मलबे और कचरे की समस्या से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सॉफ्टवेयर विकसित करने की योजना बनाई है। गुरुवार को अधिकारियों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत ‘इंटेलिजेंट रोड मेंटेनेंस मॉनिटरिंग सिस्टम’ तैयार किया जाएगा। यह सिस्टम सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखेगा और कहीं भी गड्ढा, मलबा या यातायात बाधित करने वाला कचरा मिलने पर तुरंत अलर्ट जारी करेगा।
क्या है ‘इंटेलिजेंट रोड मेंटेनेंस मॉनिटरिंग सिस्टम’
दिल्ली में सड़कों की देखरेख अब और स्मार्ट होने जा रही है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा तैयार किए जा रहे AI आधारित सिस्टम का नाम IRRMS (इंटेलिजेंट रोड मेंटेनेंस मॉनिटरिंग सिस्टम) रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म सड़कों से जुड़ी शिकायतों को विभिन्न स्रोतों से एकत्र करेगा और उन्हें एक ही जगह पर समेकित रूप से दिखाएगा। इससे विभाग को समस्याओं की स्पष्ट और एकीकृत जानकारी (Unified Visibility) मिलेगी, जिससे समाधान की प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सकेगी।
अधिकारियों के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म सड़कों से जुड़ी शिकायतों को एक ही जगह पर देखने और उनके समाधान को आसान बनाएगा। एक अधिकारी ने बताया, “यह सिस्टम सड़कों की सफाई, सुरक्षा या आवाजाही में रुकावट डालने वाले कचरे, मलबे और सड़क किनारे की बाधाओं का पता लगाने में मदद करेगा।”
सॉफ्टवेयर बनाने में आएगा 32 लाख रुपए का खर्चा
परियोजना के तहत इस सॉफ्टवेयर के विकास के लिए टेंडर जारी किया गया है। इस पर करीब 32 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे 12 महीने के भीतर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। PWD का कहना है कि IRRMS के लागू होने से सड़कों की मरम्मत की प्रक्रिया तेज होगी, शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता आएगी और मानवीय चूक की संभावना भी कम होगी। इसके अलावा, ट्रैफिक में बाधा डालने वाले कचरे और अवरोधों की समय पर पहचान होने से यातायात व्यवस्था भी बेहतर होगी।
सड़कों की स्थिति से जुड़े डेटा को भी व्यवस्थित
परियोजना की प्लानिंग के मुताबिक, IRRMS (इंटेलिजेंट रोड मेंटेनेंस मॉनिटरिंग सिस्टम) के तहत एक मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया जाएगा, जो सड़कों के नियमित निरीक्षण को आसान बनाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस ऐप की मदद से हर तीन महीने में सड़कों का व्यवस्थित निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान सड़कों की स्थिति से जुड़ा डेटा डिजिटल रूप में दर्ज किया जाएगा और उसकी समीक्षा भी इसी प्लेटफॉर्म पर की जाएगी।
सड़कों की स्थिति को करेगा और बेहतर
परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे IRRMS (इंटेलिजेंट रोड मेंटेनेंस मॉनिटरिंग सिस्टम) के साथ एक मोबाइल एप्लिकेशन भी तैयार किया जाएगा, जिसमें जियो-टैग्ड वीडियो कैप्चर करने की सुविधा होगी। अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐप सड़कों की स्थिति के जियो-टैग किए गए वीडियो बनाने में मदद करेगा। यानी जो भी वीडियो रिकॉर्ड किया जाएगा, वह सीधे लोकेशन (स्थान) से जुड़ा होगा, जिससे समस्या की सही जगह की पहचान आसान हो जाएगी।
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