संजय वाणी, आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनता से सीधे जुड़ाव की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। जिले के भाबरा विकासखंड की ग्राम पंचायत रिंगोल में आयोजित ‘रात्रि चौपाल’ में जिला कलेक्टर नीतू माथुर ने न सिर्फ ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, बल्कि अपनी आत्मीयता से सबका दिल भी जीत लिया। चौपाल को संबोधित करते हुए कलेक्टर भावुक अंदाज में बोलीं कि मैं यहां कलेक्टर बनकर नहीं, बल्कि आपके गांव की बहन बनकर आपकी समस्याएं सुनने आई हूं।

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पूल वाहन से रिंगोल पहुंचे सभी जिला अधिकारी, मौक़े पर ही सुनीं समस्याएं

इस रात्रि चौपाल की खास बात यह रही कि कलेक्टर नीतू माथुर और जिला पंचायत सीईओ संघमित्रा गौतम सहित जिले के समस्त आला अधिकारी किसी तामझाम या अलग-अलग वीआईपी गाड़ियों के बजाय एक ‘पूल वाहन’ में सवार होकर सीधे रिंगोल गांव पहुंचे।

चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी बुनियादी जरूरतें और बुनियादी ढांचे से जुड़ी शिकायतें रखीं। कलेक्टर को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, खाद, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री आवास, बिजली, जन्म प्रमाण पत्र, नामांतरण, बंटवारा, जॉब कार्ड और अतिक्रमण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कई आवेदन प्राप्त हुए।

जर्जर स्कूल भवन पर तत्काल जांच, बुजुर्गों के पास खुद पहुंचीं कलेक्टर

ग्रामीणों ने गांव के एक जर्जर स्कूल भवन को लेकर चिंता जताई, जिस पर कलेक्टर नीतू माथुर ने संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर जांच करने और रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए।

बुजुर्गों का जाना हाल, हितग्राहियों को बांटे चेक

कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर ने किसी औपचारिकता की परवाह न करते हुए खुद आगे बढ़कर चौपाल में मौजूद बुजुर्गों के पास पहुंचीं। उन्होंने जमीन पर बैठकर बुजुर्गों का हालचाल जाना और उनकी समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए अधिकारियों को पाबंद किया। चौपाल के दौरान ‘वय वंदना योजना’ के तहत 3 बुजुर्ग हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड और 3 महिला स्व-सहायता समूहों को सीसीएल लोन के चेक भी वितरित किए गए।

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सिकल सेल और महिला स्वास्थ्य को लेकर किया जागरूक

चौपाल में सिर्फ शिकायतें ही नहीं सुनी गईं, बल्कि विभिन्न विभागों ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारियां भी ग्रामीणों से साझा कीं। इस दौरान कलेक्टर ने विशेष रूप से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में ‘सिकल सेल एनीमिया’ के प्रति जागरूकता फैलाने, गर्भवती महिलाओं को समय पर पौष्टिक आहार देने और बच्चों की शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

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