संजय वाणी, आलीराजपुर। विकास के दावों के बीच मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के जोबट जनपद पंचायत से बुनियादी सुविधाओं की पोल खोलती एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। ग्राम डेकाकुंड के पास रेलवे ट्रैक तो बिछ गया और ट्रेन की पटरियां गांव तक पहुंच गईं, लेकिन इसी गांव के ‘तड़वी फलिये’ के ग्रामीण आज भी एक किलोमीटर पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं।
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बारिश में दलदल बनता है रास्ता; खटिया पर एम्बुलेंस का इंतजार
आजादी के 80 साल बाद भी तड़वी फलिये के लोग मिट्टी के कच्चे और बदहाल रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में यह रास्ता फिसलन भरे कीचड़ में तब्दील हो जाता है। स्कूली छोटे-छोटे बच्चे भारी बस्ते लेकर गिरते-संभलते स्कूल जाने की जद्दोजहद करते हैं।
सबसे दर्दनाक स्थिति तब बनती है जब गांव में कोई बीमार पड़ता है। कीचड़ के कारण एम्बुलेंस फलिये तक नहीं पहुंच पाती, जिससे परिजनों को मरीज को खटिया पर लिटाकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
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रास्ता ही साथ नहीं देता
स्थानीय ग्रामीण धनसिंह बघेल ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे भी चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित स्कूल जाएं और बीमारों को समय पर इलाज मिले, लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
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