प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किराये के मकान में दुर्घटनावश हुई मौत के मामले में अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि केवल मकान का मालिक होने के आधार पर किसी व्यक्ति को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. मकान मालिक की ऐसी विशिष्ट लापरवाही या चूक का प्रथम दृष्टया सबूत जरूरी है, जिसका मौत से सीधा और निकट संबंध हो.

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केवल मकान मालिक होना अपराध नहीं

जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने छात्र की मौत के मामले में मकान मालिक अवधेश सिंह के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी दुर्घटना में मौत होने मात्र से संपत्ति के मालिक पर आपराधिक जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती.

बाथरूम में मिला था छात्र का शव

मामला कानपुर के काकादेव थाने का है. मृत छात्र के पिता संतोष कुमार गुप्ता ने मकान मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. छात्र करीब आठ महीने से अवधेश सिंह के मकान में किराये पर रहकर आईआईटी की तैयारी कर रहा था. एक दिसंबर 2025 को उसकी मौत की सूचना पर परिजन पहुंचे तो शव बाथरूम में मिला.

गीजर से कार्बन मोनोऑक्साइड का शक

परिजनों का आरोप था कि बाथरूम में गैस गीजर लगा था और पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था. आशंका जताई गई कि कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण छात्र की मौत हुई. पुलिस ने जांच के बाद लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की. ट्रायल कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था.

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अंदाजे के आधार पर केस नहीं चल सकता

हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि गीजर सुरक्षा मानकों के खिलाफ लगाया गया था या उसमें कोई खराबी थी. यह भी साबित नहीं हुआ कि मकान मालिक को गीजर की खराबी या गैस लीकेज की जानकारी थी और शिकायत के बावजूद उसने उसे ठीक नहीं कराया. कोर्ट ने कहा कि केवल अनुमान के आधार पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. इसके बाद अवधेश सिंह के खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी गई.