Dharm Desk – काशी हमेशा चमत्कार और धार्मिक आस्था के लिए जानी जाती है. शिव की नगरी में एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है. लोगों का विश्वास इस मंदिर में दर्शन मात्र से सफेद दाग (ल्यूकोडर्मा) जैसी गंभीर बीमारी से राहत मिल सकती हैं. जिसे आमतौर पर असाध्य माना जाता है. देशभर से लोग इस चमत्कारिक आस्था के चलते यहां पहुंच रहे है और अपनी पीड़ा से मुक्ति की कामना कर रहे है. स्थानीय लोगों और पुजारियों का कहना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर फल देती है. यही वजह है कि भगवान दत्तात्रेय का ये मंदिर न सिर्फ धार्मिक, बल्कि आस्था और विश्वास के अद्भुत संगम के रूप में तेजी से प्रसिद्ध हो रहा है.

वैसे तो भगवान दत्तात्रेय के मंदिर देशभर में बहुत देखने को मिलते है, लेकिन ज्यादातार जहां भगवान दत्तात्रेय भगवान के मंदिर हैं, वहां उनके सिर्फ चरण पादुकाएं ही देखने का मिलती हैं. इसका कारण यह है कि भगवान दत्तात्रेय ने आज तक अपना शरीर नहीं छोड़ा है, वह ब्रह्मांड में आज भी विचरण करते रहते है.
यहां मिलती है सफ़ेद दाग से निजात
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से त्वचा रोगों में राहत मिलती है. प्राचीन ब्रह्माघाट पर गुरू दत्तात्रेय भगवान का मंदिर करीब 150–200 साल पुराना माना जाता है. वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्र बताते हैं कि फकीरों के देवता भगवान दत्तात्रेय का प्रादुर्भाव सतयुग में हुआ था. वैसे तो दक्षिण और पश्चिम भारत में भगवान दत्तात्रेय के ढेर सारे मंदिर हैं लेकिन इन मंदिरों में विग्रह कम उनकी पादुका ही ज्यादा है.
काशी स्थित यह देवस्थान उत्तर भारत का अकेला स्थान है. भगवान दत्तात्रेय पूरे दिन भारत के अलग अलग क्षेत्रों में विचरते रहते हैं. इसी क्रम में वो हर रोज गंगा स्नान के लिए पकाशी में मणिकर्णिका तट पर आते है. मणिकर्णिका घाट स्थित भगवान दत्तात्रेय की चरण पादुका इस बात का प्रमाण है. यह भी कहा जाता है कि ब्रह्माघाट स्थित मंदिर में भगवान दत्तात्रेय के दर्शन मात्र से मनुष्य के रोग दूर होते है.
अद्भुत और एकलौता है विग्रह
भगवान दत्तात्रेय का विग्रह सभी जगह तीन मुखों वाला मिलता है, लेकिन काशी अकेला ऐसा स्थान है जहां एक मुख वाला विग्रह विराजमान है. भगवान दत्तात्रेय ने ही बाबा कीनाराम को अघोर मंत्र की दीक्षा दी थी. आप गुरु गोरखनाथ के भी गुरु थे, कहते हैं कि सच्चे मन से स्मरण किया जाए तो दत्तात्रेय भगवान भक्त के सामने आज भी प्रकट हो जाते है, महर्षि परशुराम ने मां त्रिपुर सुंदरी की साधना इन्हीं से हासिल की.
अवधूत दर्शन और अद्वैत दर्शन
भगवान दत्तात्रेय ने मनुष्य को खुद की तलाश का रास्ता दिखाया है. भगवान दत्तात्रेय का वास गूलर के वृक्ष में मन जाता है. ब्रह्माघाट के मंदिर में दर्शन मात्र से हुए चमत्कारों कई कथाएं प्रचलित हैं. यहां भगवान दत्तात्रेय के दर्शन मात्र से ही कई बीमारियां दूर हो जाती है.
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