हरिद्वार. योग गुरु बाबा रामदेव ने युवाओं के आंदोलनों को लेकर अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां उन्होंने शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन तेज होने की चेतावनी दी थी, वहीं सोमवार को उन्होंने बच्चों को आंदोलनों से दूर रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन का अधिकार है, लेकिन यह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से होना चाहिए.
इसे भी पढ़ें- ‘शोले’ के टंकी सीन से लेकर ड्रामा स्कूल तक… राजभर ने अखिलेश को क्यों घेरा?
हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि देश में किसी धर्म, जाति या वर्ग को खतरा नहीं है, बल्कि देश का बचपन, युवा, संस्कृति और भविष्य सबसे बड़ी चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश के बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित किया जाए.
‘छोटे बच्चों को आंदोलन में शामिल करना उचित नहीं’
बाबा रामदेव ने युवाओं के आंदोलनों में बच्चों की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि छोटे बच्चों को आंदोलन में शामिल करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को आंदोलन में भेजा जाएगा तो उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी. बच्चों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की समझ उम्र बढ़ने के बाद विकसित करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बच्चों को थाने, प्रशासनिक कार्यालय या सड़कों पर प्रदर्शन के लिए भेजना सही नहीं है. इसकी जिम्मेदारी अभिभावकों की है कि वे बच्चों को शिक्षा और संस्कार दें.
‘अराजक आंदोलन नहीं, संवैधानिक आंदोलन हो’
बाबा रामदेव ने कहा कि देश में आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन आंदोलन के नाम पर अराजकता नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण, नैतिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित आंदोलन ही सही रास्ता है. उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई. बाबा रामदेव ने कहा कि देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़े कई गंभीर सवाल हैं, जिनका समाधान सरकार और समाज को मिलकर करना होगा. उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति या संस्था के प्रयास से पूरे देश की व्यवस्था नहीं बदली जा सकती. इसके लिए सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जागरूकता जरूरी है.
पहले सरकार को दी थी चेतावनी
गौरतलब है कि इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में बाबा रामदेव ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और सरकारी नौकरियों में गड़बड़ी जैसे मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो युवाओं का आंदोलन और तेज हो सकता है. उन्होंने आरोप लगाया था कि कई जगह स्कूलों में शिक्षकों, बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं की कमी है. साथ ही उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई थी
इसे भी पढ़ें- IPS अफसर की मां की हत्या पर मायावती का बड़ा हमला, बोलीं- जब पुलिस परिवार सुरक्षित नहीं तो आम जनता का क्या होगा?
हालांकि सोमवार को उन्होंने आंदोलन के तरीके को लेकर अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए, लेकिन कानून और संविधान की सीमा में रहकर. उन्होंने कहा कि देश को ऐसे आंदोलनों की जरूरत है जो व्यवस्था सुधारने में मदद करें, न कि अशांति फैलाएं.


