बांका। जिले में पुलिसिंग व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने और अपराध पर लगाम लगाने के उद्देश्य से एसपी अमितेश कुमार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। लंबित कांडों के त्वरित निष्पादन को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए, एसपी ने 154 अनुसंधान पदाधिकारियों (IO) का वेतन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है।
हाल ही में कुख्यात अपराधी सचिन सिंह के ‘हाफ एनकाउंटर’ के बाद जिले में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से एक्टिव मोड में है। इसी क्रम में एसपी द्वारा मामलों की गहन समीक्षा की गई, जिसमें पुलिसिंग के स्तर पर कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।
समय पर अनुसंधान नहीं तो वेतन नहीं: एसपी की चेतावनी
समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया कि जिले के विभिन्न थानों में बड़ी संख्या में आपराधिक मामलों का अनुसंधान निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया है। अनुसंधान में हो रहे अनावश्यक विलंब के कारण न केवल न्याय की प्रक्रिया बाधित हो रही है, बल्कि इससे अपराधियों को भी कानून की खामियों का लाभ मिल रहा है।
एसपी अमितेश कुमार ने इस प्रशासनिक चूक को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश जारी किए हैं कि समय पर अनुसंधान नहीं, तो वेतन नहीं मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारियों की पहली प्राथमिकता मामलों का समयबद्ध निष्पादन होना चाहिए।
कार्रवाई के दायरे में कई प्रमुख थाना क्षेत्र
वेतन कटौती की इस कार्रवाई में जिले के लगभग सभी थानों के पुलिस पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें बांका सदर, अमरपुर, रजौन, बेलहर, बाराहाट, कटोरिया और चांदन जैसे प्रमुख थानों के इंस्पेक्टर, छह से अधिक थानाध्यक्ष, अवर निरीक्षक (SI) और सहायक अवर निरीक्षक (ASI) शामिल हैं। कार्रवाई की सूची में अजय शर्मा, परमानंद, गुलशन पासवान और अमरेंद्र कुमार जैसे अधिकारियों के नाम प्रमुखता से शामिल हैं।
विशेष समीक्षा और आगे की राह
एसपी ने बताया कि उन अनुसंधान पदाधिकारियों की विशेष सूची तैयार की जा रही है, जिनके पास चार या उससे अधिक केस लंबे समय से लंबित पड़े हैं। अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया है कि वे लंबित फाइलों का जल्द से जल्द निपटारा करें। एसपी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि भविष्य में भी लापरवाही जारी रही, तो वेतन रोकने के साथ-साथ विभागीय कार्यवाही भी की जाएगी।
यह कदम जिले में लंबित पड़े हजारों मामलों के निष्पादन के लिए एक बड़ा संदेश है, जिससे उम्मीद है कि अब पुलिस अनुसंधान कार्य में तेजी आएगी और आम जनता को त्वरित न्याय मिल सकेगा।

